January 22, 2026

बीरगांव : रावांभाठा में प्रस्तावित बायोगैस कंप्रेस्ट प्लांट को लेकर आक्रोश ; महापौर ने बुलाई विशेष सामान्य सभा, MIC सदस्य इकराम ने भी किया विरोध…

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रायपुर। राजधानी से लगे बीरगांव नगर निगम के रावाभाठा में लगने वाले बायोगैस कंप्रेस्ट प्लांट का विरोध शुरू हो गया है इसको लेकर क्षेत्र में जमकर आक्रोश नजर आ रहा है इस संबंध में नगर निगम बिरगांव के महापौर नंदलाल देवांगन एवं एमआईसी सदस्य इकराम अहमद ने कहा कि उक्त प्लाट को लेकर महापौर सहित पूरे परिषद के लोगों में रोष व्याप्त है। नेताद्वय ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बीरगांव नगर निगम क्षेत्र की जनता रायपुर शहर की गंदगी और कचरे को नहीं बर्दाश्त करेगी। इस संबंध में वह जल्द ही पार्षदों के साथ रायपुर कलेक्टर से मुलाकात करेंगे और इस प्लांट को रावाभाठा में लगाने का विरोध करते हुए ज्ञापन सौंपेंगे। उनका कहना है कि जहां पर प्लांट लगना प्रस्तावित किया गया है उसे क्षेत्र के आसपास घनी आबादी है, हजारों की तादाद में लोग निवास करते हैं। कचरे और सब्जी की बदबू से आसपास के लोगों का जीना दुबर हो जाएगा। इसकी वजह से उनके द्वारा इस प्रस्ताव का जमकर विरोध किया जा रहा है। वही इसको लेकर 12/03/2025 बुधवार को एक विशेष सामान्य सभा बुलाये जाने हेतु महापौर ने कमिश्नर को फाइल बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि रायपुर शहर के सब्जीबाजार और उद्यानों से निकलने वाला गीला कचरा अब बेकार नहीं जायेगा। गीले कचरे से बायोगैस बनाने रावांभाठा क्षेत्र में नगर निगम की 8 एकड़ जमीन पर बायोगैस कंप्रेस्ट प्लांट लगाया जायेगा। भारत पेट्रोलियम कंपनी 60 करोड़ रुपये लगाकर 18 माह में यह प्लांट तैयार करेगी, जबकि गीला कचरा का वेस्ट मटेरियल खाद के काम आयेगा। रायपुर नगर निगम के बीरगांव में स्थित 8 एकड़ जमीन में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने भारत पेट्रोलियम कंपनी ने अपनी सहमति दे दी है। पेट्रोलियम कंपनी यहां 60 करोड़ रुपये खर्च कर यूनिट लगायेगी। बदले में नगर निगम को अपनी जमीन और प्रतिदिन 100 टन गीले कचरे का इंतजाम करना होगा। इसके लिए रायपुर नगर निगम ने शहरी क्षेत्र में स्थित बगीचे, सब्जी बाजार और गोबर का कचरा देने के साथ ही बीरगांव, खरोरा, अभनपुर, व तिल्दा नेवरा से गीला कचरा के लिए तालमेल बैठाएगा। इसकी जानकारी लगते ही नगर निगम बीरगांव जनप्रतिनिधियों और रहवासियों में आक्रोश देखा जा रहा हैं।

बता दें की बीते वर्ष छत्तीसगढ़ में कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किया गया था ,भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), छत्तीसगढ़ जैव ईंधन विकास प्राधिकरण (CBDA) व रायपुर और भिलाई नगर निगमों के बीच यह समझौता हुआ. समझौते के अनुसार, एक केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम बीपीसीएल लगभग 100 करोड़ रुपये के निवेश के साथ रायपुर और भिलाई में सीबीजी संयंत्र स्थापित करेगा. इसके प्रत्येक संयंत्र की क्षमता 100-150 टन प्रति दिन होगी.

क्या है कम्प्रेस्ड बायो गैस? : कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी), एनारोबिक सड़व की प्रक्रिया के माध्यम से अपशिष्ट जैसे सब्जीबाजार और उद्यानों से निकलने वाला गीला कचरा, कृषि अवशेष, मवेशी गोबर, गन्ना निचोड़ से प्राप्त अवशेष, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट, सीवेज उपचार संयंत्र अपशिष्ट आदि से बनाई जाती है. शुद्धिकरण के बाद इसे संपीड़ित किया जाता है. इसे कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) कहा जाता है, जिसमें मीथेन की उच्च मात्र होती है. इसके अलावा, कन्प्रेस्ड बायो गैस उपलब्ध प्राकृतिक गैस के समान है. जो सीएनजी के समान वैकल्पिक मोटर वाहन ईंधन को रूप में उपयोग किया जा सकता है. देश में बायोगैस की खपत को देखते हुए सीबीजी आने वाले सालों में ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगों में सीएनजी का स्थान लेने की क्षमता रखती है.

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