January 22, 2026

CG : गुरूजी पर गिरेगी गाज, कोई कोच बना, कोई दवा दूकान, तो कोई नेटवर्क मार्केटिंग–चिटफंड एजेंट बन कर पढ़ा रहे!

deo-BEMETARA

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में शिक्षा विभाग उस वक्त कटघरे में आ गया, जब सरकारी सेवा में पदस्थ शिक्षकों द्वारा कथित रूप से निजी व्यवसाय और नेटवर्क मार्केटिंग जैसे कार्य करने की शिकायतें सामने आईं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बेमेतरा ने पांच शिक्षकों को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर लिखित अभिकथन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

बीईओ कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, यह कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा के पत्र क्रमांक 392/शिकायत/2026, दिनांक 19 जनवरी 2026 के संदर्भ में की गई है। शिकायतों में आरोप है कि संबंधित शिक्षक शासकीय सेवा में रहते हुए अपने मूल दायित्वों को छोड़कर निजी व्यवसायों में संलग्न हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

नोटिस जिन शिक्षकों को जारी किया गया है, उनमें सेजेस हिन्दी माध्यम कन्या विद्यालय बेमेतरा में पदस्थ व्याख्याता (एल.बी.) पीला राम साहू, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मोहरेंगा के प्रधान पाठक मोहित लाल भार्गव, शासकीय प्राथमिक शाला तुमा के सहायक शिक्षक (एल.बी.) तरुण सोनी, शासकीय प्राथमिक शाला बाहुनवागांव के सहायक शिक्षक (एल.बी.) चंद्रहास सोनी तथा शासकीय प्राथमिक शाला झालम के सहायक शिक्षक (एल.बी.) हेमन चतुर्वेदी शामिल हैं।

आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि इन शिक्षकों के खिलाफ नेटवर्क मार्केटिंग से जुड़े कार्य, चिटफंड कंपनी के एजेंट के रूप में काम करने, मेडिकल स्टोर में कर्मचारी के तौर पर कार्यरत रहने, वैलनेस कोच बनकर सेवाएं देने तथा दवाइयों की बिक्री करने जैसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।

बीईओ बेमेतरा ने सभी संबंधित शिक्षकों को 23 जनवरी 2026 को अपरान्ह 4 बजे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय बेमेतरा में उपस्थित होकर अपना लिखित पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। आदेश में यह भी संकेत दिया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, शासकीय सेवा में रहते हुए किसी भी प्रकार का निजी व्यवसाय करना नियमों के विरुद्ध है। शिक्षकों का मुख्य दायित्व विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन यदि वे स्कूल समय या सेवा अवधि में अन्य व्यवसायों में संलग्न पाए जाते हैं, तो यह शिक्षा व्यवस्था की साख पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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