New Pamban Bridge : रामेश्वरम में बना ये ब्रिज किसी अजूबे से कम नहीं, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन, देखिए तस्वीरें
रामेश्वरम। भारत के दक्षिणी समुद्री किनारे पर, मुख्यभूमि को पवित्र रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता नया पंबन पुल (New Pamban Bridge) आज देश की आधुनिक इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण बनकर उभरा है. यह पुल पुराने पंबन पुल जो कि 100 वर्षों से अधिक समय तक सेवा में रहा, उसका स्थान ले रहा है और भारत की बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता का प्रमाण है. रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप गौड़ ने इसके बारे में काफी रोचक जानकारी दी. आइए जानते हैं क्या है इस राष्ट्र के गौरव के बारे में.
आत्मनिर्भरता का प्रतीक है ये पुल
प्रदीप गौड़ ने इसके बारे में लिखा है कि मंडपम रेलवे स्टेशन और रामेश्वरम द्वीप के बीच बना यह नया रेलवे समुद्री पुल केवल एक प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग क्षमताओं में भारत की एक बड़ी छलांग है. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो तकनीकी उन्नयन, पर्यावरणीय अनुकूलता और वैश्विक कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यह नवभारत की आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
पंबन पुल की ऐतिहासिक विरासत
1914 में बने मूल पंबन पुल ने समुद्र के ऊपर 2.078 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए तमिलनाडु की मुख्यभूमि (मंडपम) को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ा. इसका ‘Scherzer रोलिंग लिफ्ट स्पैन’ जलयानों को नीचे से गुजरने की अनुमति देता था और यह अपने समय से काफी आगे की तकनीक थी. यह पुल रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं की जीवनरेखा था.

नया पुल क्यों जरूरी था?
100 वर्षों से अधिक सेवा देने के बाद, पुराना पुल जंग और संरचनात्मक क्षरण के कारण जर्जर होने लगा था. साथ ही इस क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियाँ — जैसे कि भूकंपीय गतिविधियाँ, चक्रवाती तूफान और खारे समुद्री वातावरण — ने एक ऐसे आधुनिक पुल की आवश्यकता को जन्म दिया जो इन सभी स्थितियों का सामना कर सके.
प्रदीप गौड़ ने बताया कि रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को इस ऐतिहासिक कार्य को अंजाम देने की जिम्मेदारी दी गई और उसने इस सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. RVNL ने इस परियोजना को केवल एक निर्माण परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक मानक स्थापित करने वाले इंजीनियरिंग चमत्कार के रूप में देखा. हमारी टीम ने नवीनतम तकनीकों, पर्यावरणीय संतुलन और उच्च गुणवत्ता वाले निर्माण तरीकों के साथ काम किया. पुल को मौजूदा पुल के पास ही बनाया गया, इस दौरान समुद्री और रेल यातायात को निर्बाध रूप से चालू रखा गया.

निर्माण की चुनौतियां
पाक जलडमरूमध्य की तेज हवाएँ, तूफानी मौसम और ज्वार-भाटा ने निर्माण को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया था. भारी निर्माण सामग्री को इस दूरस्थ क्षेत्र तक पहुँचाना, और सीमित समय में कार्य संपन्न करना एक बड़ा कार्य था. फिर भी, 1400 टन से अधिक स्टील निर्माण, 99 गर्डर, लिफ्ट स्पैन और समुद्र के भीतर विद्युतीकरण जैसे कार्य पूरी तरह दुर्घटनारहित तरीके से पूरे किए गए- यह RVNL की सुरक्षा और गुणवत्ता प्रतिबद्धता का प्रमाण है.
यह परियोजना रेल मंत्रालय, दक्षिण रेलवे, तमिलनाडु सरकार और देश के विभिन्न ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं व सलाहकारों के सहयोग से संभव हो पाई. खास बात यह है कि इस पुल का निर्माण पूरी तरह भारतीय ठेकेदारों द्वारा किया गया-जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
इको-फ्रेंडली सामग्री, ऊर्जा कुशल लाइटिंग और निगरानी प्रणाली जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया जिससे यह परियोजना भविष्य के लिए भी टिकाऊ बनी रहे.

पुल की प्रमुख विशेषताएं
वर्टिकल लिफ्ट तंत्र: पुल का सबसे विशेष फीचर इसका 72 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जो 22 मीटर ऊपर उठता है, जिससे बड़े जहाज़ आसानी से निकल सकते हैं.
तेज़ रफ्तार क्षमता: पुराने पुल पर ट्रेनें केवल 10 किमी/घंटा की गति से चलती थीं, जबकि नया पुल 160 किमी/घंटा तक की क्षमता वाला है (फिलहाल 98 किमी/घंटा तक).
अधिक भार वहन क्षमता: 25 टन एक्सल लोड के अनुसार डिजाइन किया गया है, जिससे माल और यात्रियों की आवाजाही में बढ़ोतरी होगी.
जंगरोधी निर्माण: समुद्री वातावरण के प्रभाव से बचाव हेतु उच्च गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील, मोटे सदस्य और पॉलीसिलॉक्सेन पेंटिंग का उपयोग किया गया है, जिससे पुल की सेवा आयु न्यूनतम 35 वर्ष हो गई है.
भूकंप और चक्रवात प्रतिरोधक: पुल को भूकंपीय और चक्रवाती परिस्थितियों से निपटने के लिए मजबूती से डिजाइन किया गया है.

रियल-टाइम मॉनिटरिंग: वायु गति, संरचना की स्थिति, और ट्रेनों की निगरानी हेतु स्मार्ट सेंसर लगाए गए हैं.
विद्युतीकृत दोहरी पटरियों की व्यवस्था: भविष्य में दोहरी लाइन की सुविधा और ट्रैक्शन सिस्टम पहले से मौजूद है.
रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान और बाद में पर्यटन, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा.
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधा: रामनाथस्वामी मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए अब यात्रा ज्यादा सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक हो गई है.
पर्यटन में वृद्धि: इसका दृश्यात्मक सौंदर्य, तकनीकी आकर्षण और रामसेतु जैसे धार्मिक स्थल पर्यटकों को आकर्षित करेंगे.
आर्थिक सुधार: सामानों की आवाजाही में तेजी से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी.
नया पंबन पुल भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट समुद्री रेलवे पुल है और यह विश्व की प्रतिष्ठित संरचनाओं जैसे कि गोल्डन गेट ब्रिज (अमेरिका), टॉवर ब्रिज (लंदन), और ओरेसुंड ब्रिज (डेनमार्क-स्वीडन) की श्रेणी में स्थान पाता है. यह भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा का जीवंत उदाहरण है.
