January 23, 2026

बेमेतरा : सुरेश तिवारी Vs रमेश तिवारी का विवाद विभाग ने सुलझाया, जानिये कौन संभालेंगे अब प्राचार्य की जिम्मेदारी

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बेमेतरा। प्रभारवाद को लेकर चल रहे विवाद के बीच डीईओ ने प्राचार्य को लेकर अहम निर्देश जारी किया है। लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ के निर्देशों का हवाला देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालयों में प्राचार्य पद रिक्त होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आदेश संख्या कमाक/स्था03/टी संवर्ग/2020/175 दिनांक 29 जनवरी 2020 के तहत यह स्पष्ट किया गया था कि एकीकृत विद्यालय परिसर, जहाँ कक्षा पहली से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित हैं, वहां प्राचार्य पद रिक्त रहने पर वरिष्ठतम अधिकारी को प्रभार सौंपा जाएगा।

इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया था कि द्वितीय श्रेणी राजपत्रित पदों पर कार्यरत अधिकारी – जैसे कि नियमित व्याख्याता, व्याख्याता (एलबी) अथवा प्रधान पाठक (पूर्व माध्यमिक शाला) – में से वरिष्ठतम अधिकारी को संस्था का प्रभार दिया जाएगा।

इसी क्रम में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला जेवरी का युक्तिकरण कर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरी में विलय किया गया। इस विद्यालय में अब तक व्याख्याता (एलबी) सुरेश तिवारी प्रभारी प्राचार्य का दायित्व निभा रहे थे। गौरतलब है कि श्री तिवारी का संविलियन शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 में हुआ था।

वहीं, दूसरी ओर रमेश कुमार तिवारी वर्ष 2010 से प्रधान पाठक (पूर्व माध्यमिक शाला) के पद पर कार्यरत हैं और सेवा के लिहाज से वरिष्ठता में आगे हैं। आदेश की मंशा और वरिष्ठता के आधार पर अब रमेश कुमार तिवारी को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरी का प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया है।

इस संबंध में जारी आदेश के अनुसार, व्याख्याता (एलबी) सुरेश तिवारी को तत्काल प्रभाव से प्रभारी प्राचार्य के दायित्व से मुक्त कर दिया गया है और उनकी जगह प्रधान पाठक रमेश कुमार तिवारी को यह दायित्व सौंपा गया है।

शिक्षा विभाग का यह निर्णय विद्यालय प्रबंधन में स्पष्टता और स्थिरता लाने वाला माना जा रहा है। वरिष्ठता का पालन करते हुए प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किए जाने से न केवल प्रशासनिक अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच भी कार्यप्रणाली में स्थायित्व आएगा।इससे पहले कई विद्यालयों में वरिष्ठता को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती थी। अब विभाग ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में सेवा अवधि और वरिष्ठता का पालन सर्वोपरि होगा।

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