January 28, 2026

जशपुर : क्रिसमस पर श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेगा एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च

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जशपुर। कोरोना संकट के बीच छत्तीसगढ़ में पहली बार क्रिसमस आया है। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए बनी सरकारी गाइडलाइन की वजह से क्रिसमस का पूरा समारोह बदला-बदला रहेगा। छत्तीसगढ़ के कुनकुरी में स्थित एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च इस बार श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह बंद रहेगा।

10 हजार से अधिक लोगों की बैठक क्षमता वाले इस चर्च में क्रिसमस पर इससे कहीं अधिक लोगों की भीड़ जुटती रही है। इस बार क्रिसमस की विशेष प्रार्थना सभा के लिए चर्च में केवल पुरोहित वर्ग मौजूद रहेगा।

चर्च में क्रिसमस के लिए कोई विशेष साज-सज्जा भी नहीं हुई है। हांलाकि ईसा मसीह के जन्म की झांकी दिखाने वाली चरनी जरूर बनाई जाएगी। यह आयोजन बेहद सादगी से संपन्न करने की तैयारी है।

महागिरिजाघर के प्रवक्ता प्रफुल्ल बड़ा ने बताया, इस बार क्रिसमस की तैयारियों में कोरेाना से बचने के सारे मापदंडों के हिसाब से तैयारी की जा रही हैं। चर्च में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रार्थना की जाएगी।

उन्होंने बताया, महागिरजाघर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी वहा सिर्फ पुरोहित ही क्रिसमस की प्रार्थना करेंगे। लोगो के लिए लोयला स्कूल, होलीक्रॉस अस्पताल और संत अन्ना प्रॉविन्सलेट में प्रार्थना सभाओं की व्यवस्था की जा रही है।

बताया जा रहा है, जशपुर जिले में इस चर्च के साथ 2 लाख से अधिक अनुयायी जुड़े हुए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है कि चर्च ने आयोजन को लेकर कोई दिशानिर्देश भी जारी नहीं किया है। चर्च प्रबंधन से स्थानीय प्रशासन से समन्वय कर आयोजन की तैयारी करने को कहा गया है।

जशपुर की पहाड़ियों से घिरे इस चर्च के वास्तुकार बेल्जियम के जेएस कार्सो थे। इस चर्च का निर्माण 1962 में शुरू हुआ जो 1979 में पूरा हुआ। चर्च का लोकार्पण 1982 में हुआ। 3400 वर्गफीट आकार के इस चर्च में सात छतें और सात दरवाजे हैं। यहां 10 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ बैठ सकते हैं।

इस चर्च का निर्माण एक बीम के सहारे किया गया है जिसमें सात छतें टिकी हैं। इस चर्च के निर्माण में सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया है। इस चर्च में जीजस की मूर्ति के पास सभी धर्म के प्रतीक चिन्ह बने हुए हैं जो धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है।

गिरिजाघर का अर्धगोलाकार आकार जीजस द्वारा लोगों को बाहें फैलाकर प्रेम का संदेश देना है। इसकी सात छतें पूर्णता व पवित्रता की प्रतीक हैं जो ईसाई धर्म के सात संस्कारों को बताती है।

बताया गया, एशिया का सबसे बड़ा चर्च नगालैंड में है। उसे सुमी बैप्टिस्ट कहते हैं। उसके बाद दूसरा सबसे बड़ा चर्च कुनकुरी में बना है।

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