संसद में छत्तीसगढ़ के सांसद, अवैध नाइट क्लब और हुक्का बार के साथ ही डिजिटल अरेस्ट का मुद्दा उठाया
नईदिल्ली/रायपुर। संसद के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ़ के सांसद भी अलग अलग मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं. सांसद फूलो देवी नेताम ने अवैध नाइट क्लब और हुक्का बार का मुद्दा उठाया. वहीं बृजमोहन अग्रवाल ने डिजिटल अरेस्ट पर चिंता जताई.
राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम ने संसद में शून्य काल के दौरान देश में अवैध रूप से चल रहे नाइट क्लब और हुक्का बार का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि गोवा में एक नाइट क्लब में भीषण आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 4 विदेशी भी शामिल थे. सांसद ने कहा कि यह घटना दुखद है लेकिन इसने गोवा ही नहीं अन्य प्रदेशों में भी अवैध रूप से चलाए जा रहे नाइट क्लब और हुक्का बार की तरफ ध्यान आकर्षित किया है.
अब छोटे शहरों में भी अवैध नाइट क्लब और हुक्का बार
फूलो देवी नेताम ने कहा कि पहले अवैध व्यापार बड़े शहरों तक था, लेकिन अब ये छोटे शहरों में भी फैल गया है. अवैध रूप से संकरी गलियों में छतों पर नाइट क्लब और हुक्का बार चलाए जा रहे हैं. इनके निर्माण में सुरक्षा और फायर सेफ्टी मानकों तक का पालन नहीं किया जाता और जो नाइट क्लब मंजूरी के चल रहे हैं, वहां पर नशे का बडा व्यापार होता है, न्यूड पार्टी होती है.
‘ठोस कदम उठाने की जरूरत’
नेताम ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ही कुछ दिन पहले एक नाइट क्लब के बाहर खूनी झड़प हुई और बन्दूक से हमला हुआ. समस्या सिर्फ गोवा या रायपुर की नहीं है. देश का युवा इस दलदल में फंसता जा रहा है लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं.
नेताम ने सरकार से मांग की है कि देश में चल रहे नाइट क्लब की सेफ्टी ऑडिट कराई जाए और अवैध रूप से चलाए जा रहे हुक्का बार और नाइट क्लब को तुरन्त प्रभाव से बंद करवाया जाए.
डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी मुद्दा, बृजमोहन अग्रवाल ने मांगी AI आधारित बैंकिंग सुरक्षा
लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने डिजिटल अरेस्ट फाइनेंशियल फ्रॉड में तेजी से बढ़ोतरी को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट एक बहुत बड़ी चुनौती है.
डिजिटल अरेस्ट की वजह से गंभीर समस्या हो रही है. यह बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा को खत्म कर रहा है. यह जटिल अपराध है, जहां वीडियो कॉल के जरिए आरोपी सीबीआई या पुलिस अधिकारी बनकर पीड़ितों को कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करते हैं. झूठी गिरफ्तारी की धमकी देकर मनोवैज्ञानिक रूप से मजबूर करके पूरी जिंदगी की जमापूंजी खत्म करा देते हैं. हाल ही में एक पीड़ित ने अपनी जिंदगी की पूरी कमाई 30 करोड़ रुपए गंवा दिए.यह छोटी मोटी घटना नहीं है.ये पूंजी, मानसिक स्वास्थ का बहुत बड़ा नुकसान है. यह हमारे डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की नाक के नीचे होता है. दबाव में पीड़ित अपनी पूंजी ट्रांसफर कर देता था.
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि SC के अनुसार भारत में ही पीड़ितों ने 3,000 करोड़ गंवा दिए, जिनमें ज्यादातर बुज़ुर्ग थे. सितंबर 24 से मार्च 2025 के बीच एक महिला ने 32 करोड़ गंवा दिए. उन्होंने वित्त मंत्री से ऐसे घोटालों को रोकने के लिए बैंकिंग में AI-इनेबल्ड फ्रिक्शन (कूलिंग ऑफ एस्क्रो) लागू करने का अनुरोध किया है.
