February 13, 2026

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, एक साल बाद मिली जमानत, अंतरिम बेल का आदेश

lakhma

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने लखमा को अंतरिम जमानत देने का आदेश दिया। इस फैसले के साथ ही करीब एक साल से जेल में बंद लखमा के लिए जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।

इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बाक्ची और जस्टिस पंचोली की तीन सदस्यीय बेंच ने की। बेंच ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से जुड़े मामलों को एक साथ सुना। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कवासी लखमा को अंतरिम जमानत देने का आदेश पारित किया।

एक साल बाद जेल से बाहर आएंगे लखमा
प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने उन्हें 7 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। तभी से लखमा रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लगभग एक साल बाद वे जेल से बाहर आएंगे।

क्यों हुई थी कवासी लखमा की गिरफ्तारी
ईडी का आरोप है कि कवासी लखमा छत्तीसगढ़ शराब सिंडिकेट के अहम हिस्सेदार थे। जांच एजेंसी के मुताबिक, उनके निर्देश पर ही पूरा सिंडिकेट काम करता था और उन्हें इस नेटवर्क से सीधा फायदा मिलता था। ईडी का यह भी दावा है कि लखमा ने छत्तीसगढ़ की शराब नीति में बदलाव में अहम भूमिका निभाई थी।

आरोप है कि लखमा के इशारे पर राज्य में FL-10 लाइसेंस की शुरुआत हुई, जिससे शराब कारोबार को एक खास दिशा दी गई। ईडी का कहना है कि आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी लखमा को थी, लेकिन उन्होंने इन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

70 करोड़ के कमीशन का आरोप
ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दलील दी थी कि करीब तीन साल तक शराब घोटाला चला। इस दौरान कवासी लखमा को हर महीने लगभग 2 करोड़ रुपये का कमीशन मिलता था। इस हिसाब से 36 महीनों में उन्हें करीब 72 करोड़ रुपये मिले। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पैसे का इस्तेमाल उनके बेटे हरीश कवासी के घर निर्माण और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में किया गया।

शराब घोटाले से 2100 करोड़ की अवैध कमाई का दावा
ईडी के अनुसार, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि इस सिंडिकेट के जरिए 2100 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध कमाई की गई। इसमें नेता, कारोबारी और कुछ अधिकारी शामिल बताए गए हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर अवैध लाभ कमाया।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच फिलहाल ईडी कर रही है। ईडी ने इस मामले में ACB-EOW में एफआईआर दर्ज कराई है। एफआईआर में 2000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का जिक्र है।

ईडी की जांच में सामने आया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत ने कवासी लखमा को बड़ी राहत दी है, लेकिन जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया अभी भी जारी रहने वाली है।

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