छत्तीसगढ़ में बैलगाड़ी पर निकली बारात, परंपरा को जिंदा रखने की अनोखी पहल
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ अपनी अनोखी परंपरा और संस्कृति के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. इस बीच गरियाबंद में पुरानी परंपराओं को सहेजने की कोशिश की गई. यहां मंगलवार को एक युवक ने अपनी शादी में पुरानी परंपराओं को जिंदा कर दिया. जब युवक ने अपनी शादी में बैलगाड़ी पर बारात निकाली. इस तरह युवक ने अपनी शादी को खास बनाने के साथ साथ संस्कृति को सहेजने का संदेश दिया. कपसीडीह से मुड़तराई तक निकली यह बारात किसी आधुनिक गाड़ियों में नहीं, बल्कि पारंपरिक बैलगाड़ी में निकाली गई.
बैलगाड़ी पर निकली बारात
दूल्हे पवन ध्रुव ने बैलगाड़ी पर यह बारात निकाली. उनकी इस कोशिश में उनका परिवार शामिल हुआ. दूल्हा पवन ध्रुव, पिता रमेश्वर ध्रुव, ने इस अनोखी पहल के जरिए समाज को यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना जरूरी है. बैलगाड़ी में सजी-धजी बारात ने गांव-गांव में लोगों का ध्यान खींचा और हर कोई इस पहल की सराहना करता नजर आया.
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था हमारी पुरानी परंपरा और संस्कृति को बचाना और लोगों को उसके प्रति जागरूक करना. ध्रुव परिवार एवं युवा साथियों ने मिलकर इस विचार को साकार रूप दिया- पवन ध्रुव, दूल्हा
छत्तीसगढ़िया लोक संस्कृति की दिखी झलक
दूल्हा पवन ध्रुव पेशे से इलेक्ट्रिशियन हैं और साथ ही खेती-किसानी का काम भी करते हैं. उनकी इस पहल ने यह साबित किया कि साधारण जीवन जीने वाले लोग भी समाज में बड़ा संदेश दे सकते हैं.आज जब शादियों में दिखावा और फिजूल खर्च बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यह बैलगाड़ी बारात एक मिसाल बनकर सामने आई है. यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि हमारी लोक संस्कृति को भी जीवित रखने का सशक्त प्रयास है.
