CG : ध्वनि प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, संशोधन प्रक्रिया तेज करने का निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution) को लेकर सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने समाचार पत्र, न्यूज चैनलों की रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका (WPPIL No. 88/2023) की सुनवाई की. इस मामले में अदालत ने राज्य सरकार से कानूनों और नियमों को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया. कोर्ट ने साफ कहा कि शोरगुल और कोलाहल से जनता की सेहत और शांति प्रभावित होती है, इसलिए नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाना ज़रूरी है.
समिति का गठन: जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने 27 जनवरी 2025 को एक 5 सदस्यीय समिति गठित की. इस समिति में गृह विभाग, विधि विभाग, शहरी प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही हाउसिंग और एनवायरनमेंट विभाग के सचिव को अध्यक्ष बनाया गया है. इसके अलावा, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सचिव को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है.
समिति का मुख्य उद्देश्य 1985 के कोलाहल नियंत्रण अधिनियम और 2000 के Noise Pollution (Regulation and Control) Rules का तुलनात्मक अध्ययन करना और उनमें जरूरी संशोधन सुझाना है ताकि कानून को और सशक्त बनाया जा सके.
बैठकों में हुई चर्चा:
- 29 मई 2025 की बैठक में समिति ने अधिनियम और नियमों पर विस्तृत विचार किया और संशोधन को जरूरत माना.
- 14 अगस्त 2025 की बैठक में विभिन्न विभागों को अंतिम टिप्पणियां और स्वीकृति लेकर आने के निर्देश दिए गए.
- 15 सितंबर 2025 की बैठक में गृह विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित संशोधन का ड्राफ्ट अभी विभागीय परीक्षण में है और अंतिम सुझाव देने के लिए अतिरिक्त समय चाहिए.
कोर्ट की कार्यवाही: 22 सितंबर 2025 को हुई सुनवाई में राज्य की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल शशांक ठाकुर पेश हुए. उनके साथ अधिवक्ता सौरभ काले, त्रिविक्रम नायक, सूर्या कवालकर डांगी और हस्तक्षेपकर्ताओं के पक्ष से अधिवक्ता शांतम पाटिल व राकेश चौबे उपस्थित रहे.
कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार को निर्देशित किया कि समिति की रिपोर्ट और प्रस्तावित संशोधन जल्द से जल्द तैयार किए जाएं. ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं. इस मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2025 को रखी गई है.
अदालत का सख्त संदेश: हाईकोर्ट ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण केवल कानून का विषय नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के जीवन के अधिकार और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है. इसलिए इस दिशा में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
