January 23, 2026

‘IAS-IPS चला रहे सरकार, तो 14 मंत्रियों की क्या जरूरत? दे इस्तीफा !’, D Ed अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा मंत्री का बंगला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सियासी पारा इस वक्त चरम पर है. लेकिन यह गर्मी किसी चुनावी मंच की नहीं, बल्कि अपने हक की लड़ाई लड़ रहे बेरोजगार युवाओं के गुस्से की है. सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में नियुक्ति की मांग को लेकर 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे D.Ed अभ्यर्थियों का शुक्रवार को सब्र टूट गया. सुबह-सुबह बड़ी संख्या में अभ्यर्थी नवा रायपुर स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव करने पहुंच गए, जिससे पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया.

मंत्री के बंगले पर हड़कंप, पुलिस के हाथ-पांव फूले
शिक्षा विभाग की हालिया समीक्षा बैठक से कोई फैसला नहीं निकलने के बाद गुस्साए अभ्यर्थी सीधे मंत्री के बंगले जा पहुंचे. अचानक उमड़ी भीड़ को देखकर पुलिस-प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. आनन-फानन में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और प्रदर्शनकारियों को बंगले के बाहर ही रोक दिया गया.अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार नियुक्ति नहीं दे रही, सिर्फ बैठकों और फाइलों का खेल चल रहा है.

“IAS-IPS चला रहे सरकार, तो 14 मंत्रियों की क्या जरूरत?”
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का गुस्सा इस कदर फूट पड़ा कि उन्होंने सरकार पर सीधा हमला बोला. अभ्यर्थियों ने कहा -“यह सरकार IAS और IPS अफसर चला रहे हैं. अगर वही सब कुछ तय कर रहे हैं, तो इन 14 मंत्रियों की जरूरत क्या है? ये लोग सिर्फ आलीशान बंगले में बैठकर बयानबाजी कर रहे हैं.इन्हें नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.” यह नारा अब आंदोलन की सबसे बड़ी सियासी लाइन बन गया है.

खून से लिखा पत्र – सरकार के नाम आखिरी गुहार
आंदोलनकारियों का दर्द अब शब्दों से आगे निकल चुका है. कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर सिर्फ एक मांग रखी है -“हमें नियुक्ति पत्र चाहिए.” प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे घर से यह सोचकर निकले हैं कि या तो नौकरी लेकर लौटेंगे, या फिर उनकी लाश जाएगी.

कड़ाके की ठंड, गिरती सेहत, लेकिन अडिग हौसला
बता दे कि 24 दिसंबर से जारी आमरण अनशन ने कई युवाओं की हालत बिगाड़ दी है. खुले आसमान के नीचे महिलाएं और छोटे बच्चे भी धरने पर डटे हैं. कई आंदोलनकारियों को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन वे वहां से फिर सीधे धरना स्थल लौट आए.अभ्यर्थियों ने साफ चेतावनी दी है “अगर किसी की जान गई, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी.”

हाईकोर्ट का आदेश और 2300 खाली पदों का सवाल
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना कर रही है. उनका कहना है कि अदालत ने रिक्त पदों को दो महीने में भरने का निर्देश दिया था, लेकिन आज भी करीब 2300 पद खाली पड़े हैं.काउंसलिंग और पात्रता पूरी होने के बावजूद हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं.

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