छत्तीसगढ़ में कर्मचारी-अधिकारियों का आंदोलन: फेडरेशन का टेबल-टू-टेबल संपर्क अभियान शुरू, 29 से 31 दिसंबर तक करेंगे ‘काम बंद–कलम बंद’
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारी-अधिकारियों के असंतोष ने एक बार फिर बड़ा रूप ले लिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर 29 से 31 दिसंबर 2025 तक तीन दिवसीय “काम बंद–कलम बंद” आंदोलन (Work stop pen down strike) का आह्वान किया है। इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए नवा रायपुर में फेडरेशन द्वारा सभी विभागों में टेबल-टू-टेबल संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, जिससे आंदोलन को जमीनी स्तर पर मजबूत किया जा सके।
कर्मचारियों से सीधा संवाद, एकजुटता पर जोर
फेडरेशन की जिला शाखा नवा रायपुर के नेतृत्व में चलाए जा रहे इस संपर्क अभियान के दौरान कर्मचारियों और अधिकारियों से प्रत्यक्ष संवाद किया गया। प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने विभिन्न कार्यालयों में पहुंचकर आंदोलन की रणनीति, उद्देश्य और कार्ययोजना की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक कर्मचारियों को एकजुट रहकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

आंदोलन को लेकर कर्मचारियों में दिखा जोश
संपर्क अभियान के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों और अधिकारियों ने आंदोलन के प्रति अपनी सहमति जताई। सभी ने यह भरोसा दिलाया कि 29, 30 और 31 दिसंबर को नवा रायपुर स्थित सभी शासकीय कार्यालयों में हड़ताल को पूरी मजबूती से सफल बनाया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से लंबित मांगों पर अब और इंतजार संभव नहीं है और यह आंदोलन अधिकारों की लड़ाई है।
संगठनात्मक मजबूती का प्रदर्शन
इस अभियान में विभिन्न विभागों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। जय कुमार साहू ने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आंदोलन केवल मांगों का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा हुआ है। महिला प्रकोष्ठ, राजपत्रित संघ, लिपिक संघ, वाहन चालक संघ सहित कई संगठनों की सक्रिय भागीदारी ने आंदोलन की व्यापकता को और मजबूत किया है।
प्रशासन पर बढ़ता दबाव
तीन दिवसीय हड़ताल से शासकीय कार्यों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यह आंदोलन न केवल कर्मचारियों के बीच एकता का प्रतीक बन रहा है, बल्कि शासन-प्रशासन पर भी दबाव बढ़ा रहा है कि वे कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लें और संवाद के जरिए समाधान निकालें।
