January 22, 2026

छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ की बड़ी स्ट्राइक शुरू, 52 लाख लोग प्रभावित

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दंतेवाड़ा। बस्तर समेत पूरे प्रदेश में छत्तीसगढ़ लघु वनोपज प्रबंधक संघ ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की शुरुआत कर दी है. प्रदेश लघु वनोपज संघ अब बड़ी लड़ाई के मूड में है. सात सूत्रीय मांगों को लेकर संघ की तरफ से हड़ताल का आगाज किया गया है. जिसमें नियमितिकरण बड़ी मांग है.

लघु वनोपज प्रबंधक संघ की क्या है दलील?: लघु वनोपज प्रबंधक संघ की माने तो उनके प्रतिनिधि ने हड़ताल से पहले राज्य लघु वनोपज संघ के अधिकारियों से मुलाकात की थी. जिसमें लघु वनोपज संघ ने अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखा था. फिर भी अधिकारियों की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया. इसलिए लघु वनोपज संघ ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया.

52 लाख लघु वनोपज संग्राहकों पर असर: लघु वनोपज प्रबंधक संघ की तरफ से बताया गया है कि अगर हड़ताल लंबी चली तो प्रदेश के 52 लाख लघु वनोपज संग्राहकों पर इसका असर पड़ेगा.छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संग्रहण में पूरे देश मे नंबर एक है. लघु वनोपजों के संग्रहण में प्रदेश सरकार को 13 राष्ट्रीय अवार्ड भी मिले हैं. लघु वनोपज संघ के मुताबिक सरकार और अधिकारी 37 साल से प्रबंधकों का शोषण कर रहे हैं.

37 वर्ष बीत गए अब हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं. अब नियमितीकरण के अलावा दूसरा कोई विकल्प हमे मंजूर नहीं है- राकेश कवासी, जिला अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज संघ

छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ की डिमांड: छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ की डिमांड की बात करें तो सबसे पहली और प्रमुख मांग प्रबंधकों के नियमितिकरण की है. इसके अलावा 7, 8, 9 ग्रेड पे नहीं मिलने से भी छत्तीसगढ़ लघु वनोपज प्रबंधक संघ नाराज है.

प्रबंधक पिछले 37 सालों से 14 लाख लघु वनोपज संगठनकर्ता परिवारों को शासन की योजनाओं का फायदा पहुंचा रहे हैं. इसमें मुख्य रूप से तेंदुपत्ता संग्रहण, भुगतान, बोनस का वितरण,14 लाख परिवारों का बीमा, छात्रवृत्ति, 65 प्रकार के लघु वनोपज का न्यूनतम संग्रहण दर शामिल है.-रामाधर, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ लघु वनोपज संघ

यह हड़ताल समय पर खत्म नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ सहित बस्तर के 52 लाख लघु वनोपज संग्राहकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. जो छत्तीसगढ़ सरकार के लिए चिंता की बात है.

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