10वीं की छात्रा ने बनाई कमाल की जैकेट, अंदर छिपा है जादुई स्विच, दबाते ही दुम दबाकर भागेंगे किडनैपर
रतलाम। ठंड के मौसम में जैकेट सिर्फ़ ठंड से बचाने का काम करती हैं, लेकिन रतलाम ज़िले के जावरा इलाके के ऊपरवाड़ा गांव के 10वीं क्लास की एक स्टूडेंट तनिष सोलंकी ने जैकेट को सुरक्षा का एक पावरफुल ज़रिया बना दिया है. तनिष की बनाई “हेल्प जैकेट” में एक खास इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है जिसमें एक छिपा हुआ स्विच लगा है. जब स्विच दबाया जाता है, तो यह अपने आप पहले से सेव किए गए नंबरों पर कॉल करता है, पहनने वाले के मोबाइल फोन पर इमरजेंसी रिंगटोन बजाता है और पीड़ित की लाइव लोकेशन शेयर करता है.
10वीं की छात्रा ने बनाया ‘स्मार्ट हेल्प जैकेट’
दरअसल, तनिष ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स लगाकर एक आम जैकेट को सेफ्टी डिवाइस में बदल दिया है. इस जैकेट में एक छिपा हुआ स्विच है जैसे ही स्विच दबाया जाता है, पहले से चुने गए नंबरों पर ऑटोमैटिकली कॉल लग जाती है, मोबाइल फोन पर इमरजेंसी रिंगटोन बजती है, और पीड़ित की लाइव लोकेशन भी पता चल जाती है. खास बात यह है कि अगर इमरजेंसी के दौरान मोबाइल फोन गिर जाए या कोई हमलावर उसे छीन ले तब भी जैकेट के ज़रिए मदद बुलाई जा सकती है. इस अनोखे इनोवेशन को अब सरकार के INSPIRE अवॉर्ड्स प्रोग्राम के तहत नेशनल लेवल कॉम्पिटिशन के लिए चुना गया है, जो दिल्ली में होगा.
कैसा आया ये आइडिया?
तनिष ने इस जैकेट को डिज़ाइन करते समय बच्चों की सुरक्षा को सबसे ज़्यादा अहमियत दी. उनका मानना है कि किडनैपिंग या अपहरण के मामलों में अपराधी अक्सर सबसे पहले पीड़ित का मोबाइल फ़ोन छीन लेते हैं. इसलिए, यह जैकेट ऐसी स्थितियों में बच्चों की मदद करने के लिए एक पावरफुल टूल हो सकती है. यह आइडिया किसी फ़िल्म या YouTube से नहीं, बल्कि एक असली घटना से आया है. तीन साल पहले तनिष ने अपने गांव में एक बच्चे को किडनैप होते देखा था. उस दिन उन्होंने तय किया कि भविष्य में कोई भी बच्चा कभी भी असहाय नहीं होगा.
किडनैपिंग रोकने के लिए अनूठी मिसाल
यह जैकेट रेडीमेड किट से नहीं बल्कि अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स को जोड़कर बनाई गई है. तनिष ने यह जैकेट अपने छोटे भाई-बहनों के लिए भी बनाई है ताकि वे स्कूल जाते समय, खेलते समय या खेतों में काम करते समय सुरक्षित रह सकें. तनिष सोलंकी का सपना है कि सरकार इस जैकेट को पहचाने और ज़रूरी टेक्निकल अपडेट के साथ इसे बड़े पैमाने पर लागू करे, ताकि यह बच्चों के अपहरण और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को कम करने में मदद कर सके.
