जिनके नाम से कांपता था जंगल, हाथों में हर वक्त रहती थी राइफल, अब बचा रहे लोगों की जान, खूंखार नक्सली की अनोखी पहल
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित गरियाबंद जिले में एक सुकून देने वाली खबर सामने आई है। जिन नक्सलियों के हाथ में कभी बंदूक होती थी और जंगल में उनका खौफ रहता था वही नक्सली अब लोगों की जान बचाने के लिए मानवता का काम कर रहे हैं। गरियाबंद जिले में सरेंडर कर चुके कई नक्सलियों ने रक्तदान शिविर में पहुंचकर रक्तदान किया।
कभी बंदूक थामने वाले नक्सली अब मानवता की सेवा कर रहे हैं। दरअसल, गरियाबंद जिले का मालगांव में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। इस रक्तदान शिविर में पूर्व नक्सली कमांडर सुनील और उसके साथ जंगल में भटकने वाले 10 दूसरे सरेंडर कर चुके नक्सली भी शिविर में पहुंचे।
पूर्व नक्सलियों ने किया रक्तदान
पूर्व नक्सली कमांडर सुनील इस रक्त शिविर में आने वाले लोगों का हौंसला बढ़ाने के साथ रक्तदान किया। सुनील के साथ आए बाकी नक्सलियों ने भी मानवता की सेवा के लिए रक्तदान किया। सरेंडर कर चुके नक्सली सुनील ने बताया कि वह कभी जंगलों में हथियार उठाकर हिंसा का रास्ते पर चलते थे लेकिन सरेंडर करने के बाद अब वह समाज के मुख्यधारा में लौटकर सेवा का कार्य कर रहे हैं।
सुनील ने बताई भावुक कहानी
पूर्व नक्सली सुनील के अनुसार, सरेंडर करने के बाद उसकी पत्नी एक बार गंभीर रूप से बीमार हुई थी। उसे खून की जरुरत थी। तब एक समाजसेवी ने उसकी मदद करते हुए उसकी पत्नी की जान बचाने के लिए खून दिया था। इसके बाद से सुनील की जीवन में बड़ा बदलाव आया। अब आज सुनील भी उसी रास्ते पर चलकर दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान करता है।
कौन है सरेंडर कर चुका नक्सली सुनील
सुनील धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा (डीजीएन) डिवीजन कमेटी के उदंती एरिया का कमांडर था। उसने साल 2025 में सुनील अपने 7 नक्सली साथियों के साथ जवानों के सामने सरेंडर कर दिया था। नक्सलियों ने समर्पण के दौरान एक एसएलआर, तीन इंसास और एक सिंगल शॉट राइफल समेत कुल 5 हथियार पुलिस को सौंपे थे। सुनील के सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
