युक्तियुक्तकरण : अफसरों ने जमकर की मनमानी, कनिष्ठों को बचाकर वरिष्ठों का किया तबादला, नियमों की उड़ाई धज्जियां, बड़ी संख्या में आदेश निरस्त….
रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग फिर सवालों के घेरे में आ गया हैं। रायपुर संभाग में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में सैकड़ों अनियमितताएं सामने आई हैं। अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने निर्धारित दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर जूनियर शिक्षकों को लाभ पहुंचाया, जबकि सीनियर शिक्षकों को अतिशेष बताकर दूरस्थ इलाकों में तबादला कर दिया। काउंसिलिंग में पद छिपकर रखे गए। महिला और दिव्यांग शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधानों को भी दरकिनार किया गया। संभाग स्तरीय सुनवाई में जांच पड़ताल के दौरान कमेटी की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है, जो शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़े कर रहा है. पड़ताल में यह सामने आया है कि रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद जिले से 530 शिक्षकों की शिकायत संभागीय कमेटी को मिली थी, जिसकी सुनवाई के बाद बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। बड़ी संख्या में प्रभावित शिक्षकों के अभ्यावेदन मान्य कर उनके युक्तियुक्तकरण आदेश को निरस्त कर दिया गया हैं।
सूबे में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान गड़बड़ी करने वाले छह से अधिक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है. बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी गड़बड़ी को मानने को तैयार नहीं थे न ही कोई बड़ी कार्रवाई की गई। उल्टा अपनी पीठ थपथपाते रहे. अब जिला और संभाग स्तर की कमेटियों में अब तक दर्ज शिकायतों की पड़ताल से गड़बड़ियों का पर्दाफाश हो रहा है। पर रायपुर संभाग में अब तक किसी तरह की बड़ी कार्यवाई सामने नहीं आई हैं। अंदेशा व्यक्त किया जा रहा हैं अब कई प्राचार्य, बीईओ, बीआरसी, एसडीएम, डीईओ, जिला पंचायत सीईओ और कुछ कलेक्टर पर भी गाज गिर सकती हैं।
रायपुर संभाग में कुल 530 शिक्षकों ने शिकायतें दर्ज की, जिनमें से 373 प्रकरणों का निराकरण हो चुका है. लगभग 50 आवेदनों को आरक्षित रखा गया है, जहां ज्यादातर सीनियर शिक्षकों के मामले बाकी हैं. संभागायुक्त महादेव कावरे ने बताया कि ज्यादातर शिकायतों का निपटारा हो चुका है. रायपुर जिले में सबसे अधिक आवेदन (लगभग 200) होने के कारण कार्रवाई जारी है।
धमतरी जिले में 81 आवेदनों में से 22 शिकायतें सही पाई गईं. ज्यादातर मामलों में सीनियर शिक्षकों को अनदेखा कर जूनियरों का युक्तियुक्तकरण किया गया।
गरियाबंद जिले में 137 आवेदनों में 41 शिकायतें मान्य किया गया. यहां भी सीनियरों को अतिशेष बताकर ट्रांसफर के आरोप सिद्ध हुए.
बलौदाबाजार जिले में सभी 22 आवेदन खारिज किए गए, लेकिन कमेटी ने गड़बड़ी की जांच जारी रखने का संकेत दिया है.
रायपुर जिले में लगभग 200 आवेदनों में लगभग 60 आवेदनों का निराकरण करने के बाद 15 शिकायतें सही पाई गईं. यहाँ भी नियम विरुद्ध अतिशेष बताकर ट्रांसफर कर कई शिक्षकों को परेशान किया गया। व्याख्याताओं के युक्तियुक्तकरण मामले में भी गम्भीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
महासमुंद जिले में 85 आवेदनों में केवल 6 शिकायतें मान्यकी गई हैं।
अभी तक की सुनवाई के बाद निराकरण हुए आवेदनों मे 50 से ज़्यादा आवेदन को फिर से सुनवाई करने के लिए आरक्षित रखा गया है, क्योंकि वरीयता लिस्ट विभागों से मंगाई गई है. वरीयता लिस्ट आने के बाद इन आरक्षित प्रकरणों में सुनवाई होगी।
शिक्षक संघ का आरोप – युक्तियुक्तकरण में हुआ जमकर लेन-देन
शिक्षक संघ और पीड़ित शिक्षकों का आरोप है कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में जमकर लेन-देन हुआ है. अपनों को बचाने के लिए सीनियरों के साथ अन्याय किया गया. जूनियरों को प्राथमिकता देकर सीनियरों को अतिशेष की श्रेणी में डाल दिया. एक प्रभावित शिक्षिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पड़ताल में प्राचार्यों के पत्र सामने आए थे, जिसमें स्पष्ट था कि अतिशेष बताए गए शिक्षक सीनियर थे. बावजूद इसके अधिकारियों ने सुनवाई नहीं की और ट्रांसफर कर दिया।
शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने कहा हमने पहले ही इस मुद्दे को लेकर ज्ञापन दिया, हड़ताल किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई. खानापूर्ति के लिए कुछ जगह कार्रवाई हुई. बाकी जिलों में कार्रवाई नहीं हुई. रायपुर में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हुई है बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या उच्चाधिकारी इस गड़बड़ी के षड्यंत्र में शामिल हैं? अगर हां, तो ये जिम्मेदार अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल करने पर तुले हुए हैं.
कांग्रेस ने कहा – शिक्षा विभाग के सचिव बेलगाम
राज्य स्तर पर युक्तियुक्तकरण से 16,165 शिक्षक और प्राचार्य समायोजित हुए हैं, लेकिन पदस्थापना तिथि, विषय, विकलांगता और परिवीक्षा जैसे कारकों की अनदेखी से विवाद बढ़ा. जूनियर सेटअप के आधार पर अतिशेष चिन्हांकन में गड़बड़ी सामने आई, जिससे हज़ारों पद प्रभावित हुए. इस मामले में कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव अक्षम अधिकारी हैं और बेलगाम हो गए हैं. इस गड़बड़ी में उनका पूरा हाथ है. सरकार इसके लिए जिम्मेदार है. युक्तियुक्तकरण में जमकर लेन-देन का खेल खेला गया है. युक्ति क्तकरण के नाम पर पैसा लेकर ट्रांसफर किया गया है. अब जांच समिति में लगभग अधिकारियों द्वारा की गई गड़बड़ी बाहर आ रही है।
बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
शिक्षक संगठन इसे ‘पद समाप्त करने की साजिश बता रहे हैं. इसे लेकर जून में धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं. शिक्षा विभाग की यह प्रक्रिया न केवल शिक्षकों के भविष्य पर सवाल खड़ी कर रही है, बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. प्रभावित शिक्षक स्कूल नहीं जा रहे हैं. बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को चुनौती दे रहे हैं. सरकार को तत्काल हस्तक्षेप कर पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए.
