January 22, 2026

बदलता बस्तर : जो कभी नक्सलियों का गढ़ था, अब वहां… खुली ग्रामीण बैंक की ब्रांच, CM ने की शुरुआत

BASTAR BANK

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले के पामेड़ इलाके में राज्य सरकार ने ग्रामीण बैंक की शाखा की शुरुआत की है। अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को बीजापुर जिले के अंदरूनी और पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे पामेड़ इलाके में डिजिटल माध्यम से छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की शाखा की शुरुआत की।

मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर कहा, जिस पामेड़ को कभी माओवादियों के बटालियन नंबर-एक का गढ़ माना जाता था, आज वहां बैंक खुल रहे हैं। कन्या आश्रम बन रहे हैं और लोग खुले मन से सुशासन शिविरों में भाग ले रहे हैं। यह बदला हुआ बस्तर है जो आत्मविश्वास, विकास और लोकतंत्र का प्रतीक है।’

बैंक खुलने से 50 गांवों को लाभ
मुख्यमंत्री ने इसे विकास और विश्वास की नयी सुबह बताते हुए कहा कि अब ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाओं के लिए 100 किलोमीटर दूर आवापल्ली नहीं जाना पड़ेगा। यह पहल सरकार के सुशासन और समावेशी विकास के दृष्टिकोण को दर्शाती है। सीएम ने बताया कि इस बैंक शाखा से पामेड़ और आसपास के 50 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा, जहां अब खाता खोलने, पैसा निकालने और महतारी वंदन योजना जैसी योजनाओं की राशि लेने में सुविधा होगी।


रायपुर। बस्तर के LOS को नक्सलियों की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है, क्योंकि ये एक ऐसी टीम है जो संगठन के मजबूती के लिए कार्य करती है. नक्सल संगठन के विस्तार से लेकर संगठन में नए लोगो को जोड़ने का कार्य LOS करती है. कांकेर जिले का कोयलीबेड़ा ब्लाक अंतर्गत पानीडोबीर गांव में नक्सलियों का मजबूत LOS का गढ़ था, लेकिन अब इसी गढ़ में एक निजी बैंक खुल गया है.

नक्सलियों के मजबूत LOS गढ़ में आजादी के बाद पहली बार खुला बैंक

बस्तर के LOS को नक्सलियों की रीढ़ की हड्डी भी कहा जाता है, क्योंकि ये एक ऐसी टीम है जो संगठन के मजबूती के लिए कार्य करती है. नक्सल संगठन के विस्तार से लेकर संगठन में नए लोगो को जोड़ने का कार्य LOS करती है. कांकेर जिले का कोयलीबेड़ा ब्लाक अंतर्गत पानीडोबीर गांव में नक्सलियों का मजबूत LOS का गढ़ था, लेकिन अब इसी गढ़ में एक निजी बैंक खुल गया है.

आजादी के बाद पहली बार खुला बैंक
छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला अब बदलने लगा है. नक्सलवाद से ग्रसित इस जिले के अतिसंवेदनशील इलाको में विकास ने रफ्तार पकड़ ली है. किसी ने सोचा नहीं था सड़के बनेंगी, कभी यहां बैंक भी खिलेगा. अब उस जमी पर बंदूक की गोली नहीं, भल्कि भरोसे के खाते खुलेंगे. हिंसा पर विकास की यह पहली जीत. छत्तीसगढ़ राज्य के वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने पानीडोबीर में निजी बैंक का डिजिटली उद्घाटन भी किया. जनरपट की टीम जिला मुख्यालय से उस गांव पहुंची. यहां के लोगो ने बताया कि पहले की तुलना में अब बहुत बदलाव आया है. जो समस्याएं होती थी वह अब बहुत कुछ दूर हो चुकी है. इलाके में पक्की सड़क, पानी, बिजली, की सुविधा मिलने लगी है.

पहले 20 किलोमीटर तक करना था सफर
पानीडोबीर गांव के ग्रामीणों ने बताया कि 20 किमी का सफर करना पड़ता था बैंक जाने के लिए अब बैंक खुलने से उन्हें गांव में ही सुविधा मिलेगा. हमारी सोच में ही नही था कि यहां बैंक खुलेगा. आज खुल गया हम बहुत खुश है. गांव की युवती सनिता नौगो कहती है मैं साल भर से लगातार आवेदन दे रही थी बैंक सुविधा के लिए..स्वास्थ्य सुविधा के लिए आज गांव नियद नेल नार योजना से जुड़ा अब गांव में बैंक खुल गया उप स्वास्थ्य केंद्र बन रहा है सड़क पहुंच गई है. गांव के जनप्रतिनिधि पीलू उसेंडी कहते है पहले इस क्षेत्र में नक्सलवाद का ख़ौफ़ था अब तो शांति की बयार बह रही है.

नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ रहा
पनीडोबीर वो गांव है जिसे नक्सलवाद का गढ़ माना जाता था. एक समय इस इलाके नक्सलवाद से जुड़ी काफी खबरे निकल कर सामने आया करती थी लेकिन अब इलाके में शांति आई है. चिलपरस और आलपरस सहित आसपास के प्रभाव वाले इलाकों में जवानों की तैनाती ने नक्सलियों के दांत कट्ठे कर दिए है. यही वजह है कि इस इलाके में सड़के बनी, पुल-पुलिया के निर्माण हुआ. बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल, आश्रम की सुविधाओ को दुरूस्त किया गया. पानी के लिए बोर खनन, शेड निर्माण, बेहतर कनेक्टिविटी की सुविधा मिलनी शुरू हुई और अब इन ग्रामीणों के द्वार बैंक की सुविधा भी पहुंच गई है.

बस्तर में विकास ने पकड़ी रफ्तार
उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़ के उन जिलों में से एक है जहाँ नक्सलवाद का दंश, यहाँ के लोग बरसों से झेलते आ रहे है. सरकार ने इसकी समाप्ति के लिए मार्च 2026 की तारीख तय कर दी है. बस्तर के विभिन्न इलाकों में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ की खबरे आने लगी है. मुठभेड़ में बड़ी संख्या में नक्सली मारे जा रहे है. उत्तर बस्तर का भी यही हाल है. यहाँ भी नक्सलवाद अब काफी पीछे नजर आ रहा है. संवेदनशील इलाकों में खोले गए कैम्पस से बहुत से इलाको में नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगा है. जिसकी वजह से अब इन इलाकों में विकास ने रफ्तार पकड़ ली है.

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