CG : अब महिलाएं भी कर सकेंगी नाइट ड्यूटी, बदले जाएंगे गुमास्ता नियम!, विधानसभा में रखे जाएंगे ये संशोधन विधेयक
रायपुर। छत्तीसगढ़ में श्रम कानूनों को समयानुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। श्रम विभाग दुकान एवं स्थापना अधिनियम 2017 में अहम संशोधन करने जा रहा है, जिसका विधेयक (Shop Establishment Act Amendment) इसी शीतकालीन सत्र में विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। प्रस्तावित संशोधनों से महिला कर्मचारियों, दुकान संचालकों, होटल-रेस्टोरेंट और सर्विस सेक्टर को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
महिला कर्मी की सहमति से नाइट ड्यूटी संभव
संशोधन के बाद यदि महिला कर्मचारी सहमत होती हैं, तो दुकान मालिक उन्हें रात की ड्यूटी पर लगा सकेंगे। अभी तक रात 10 बजे के बाद महिलाओं से काम कराना श्रम कानून का उल्लंघन माना जाता था। इस बदलाव से 24 घंटे चलने वाले मेडिकल स्टोर, होटल, रेस्टोरेंट और सर्विस सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि सुरक्षा के लिए महिला कर्मियों के आने-जाने की जिम्मेदारी पूरी तरह दुकान संचालक की होगी और पॉश एक्ट के तहत आंतरिक समिति बनाना भी अनिवार्य रहेगा।
गुमास्ता नियम में ढील, छोटे व्यापारियों को फायदा
संशोधन के तहत गुमास्ता लेने की सीमा भी बदली जा रही है। अभी 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली दुकानों के लिए गुमास्ता अनिवार्य है, लेकिन अब यह सीमा बढ़ाकर 20 कर्मचारी किए जाने का प्रस्ताव है। इससे प्रदेश की हजारों छोटी दुकानों को गुमास्ता की बाध्यता से राहत मिलेगी और अनुपालन का बोझ कम होगा।
ओवरटाइम की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
श्रम विभाग ओवरटाइम नियमों (Overtime rules) में भी संशोधन करने जा रहा है। फिलहाल एक कर्मचारी से तिमाही में 125 घंटे से अधिक ओवरटाइम नहीं कराया जा सकता। नए संशोधन के बाद यह सीमा बढ़कर 144 घंटे प्रति तिमाही हो सकती है, जिससे उद्योगों और सेवा क्षेत्र में कार्य संचालन अधिक लचीला होगा।
गुमास्ता जारी करने की प्रक्रिया में बदलाव
एक और बड़ा बदलाव गुमास्ता जारी करने की प्रक्रिया को लेकर प्रस्तावित है। अब तक नगरीय निकायों के माध्यम से गुमास्ता जारी किया जा रहा था, लेकिन संशोधन के बाद यह अधिकार सीधे जिला श्रम कार्यालय के पास होगा। इसके लिए पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की जा रही है। वहीं नगरीय निकाय अब ट्रेड लाइसेंस जारी करेंगे, जो हर दुकान के लिए अनिवार्य रहेगा।
क्यों जरूरी है गुमास्ता
गुमास्ता सिर्फ एक पंजीकरण नहीं, बल्कि व्यापार की पहचान है। इसके बिना न तो व्यावसायिक लोन मिल पाता है, न ही सरकारी योजनाओं का लाभ। करंट अकाउंट खोलने से लेकर शासकीय टेंडर में भागीदारी तक, हर जगह गुमास्ता जरूरी दस्तावेज माना जाता है। संशोधन के बाद होटल, सिक्योरिटी एजेंसी और सर्विस सेक्टर के कारोबारियों को इससे खास फायदा होगा।
