January 22, 2026

CG : बाइसन को दे दी कालातीत दवा, तड़प तड़प कर उखड़ी होगी साँसे, वन्यजीव प्रेमी ने की न्याय की मांग

BISON

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बारनावापारा अभ्यारण से गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व भेजी गई मादा सब एडल्ट बाइसन की मौत मामले में चौकाने वाला खुलासा सामने आ रहा हैं। इसी वर्ष जनवरी माह में 12 घंटे की ट्रक की यात्रा के बाद गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व पहुंचने पर इस मादा सब एडल्ट बाइसन की मौत हो गई थी। इस मामले में वन विभाग के ही दस्तावेज बता रहे हैं कि बाइसन कालातीत दवा की इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दी गई।

बेहोशी से निकालने की दवा एक्सपायर थी !
बता दें कि बड़े वन्य प्राणियों को ट्रांस्लोकेट करने के लिए पहले उन्हें पकड़ने (कैप्चर) के लिए बेहोश किया जाता है। बेहोशी से निकालने के लिए उसी बेहोश करने वाली दवा की एंटीडॉट (रेवेर्सल) का इंजेक्शन दिया जाता है। दस्तावेज़ों के मुताबिक़ दुर्भाग्य शाली मादा सब एडल्ट बाइसन को बेहोश करने की जो दवा दी गई थी वह कैपटीवान थी। कैपटीवान कितनी ताकतवर होती है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह मोर्फिन से तीन से आठ हजार गुना ताकतवर होती है। मादा सब एडल्ट को कैपटीवान तो दी गई पर उसका असर पलटने के लिए जो एक्टिवोन का इंजेक्शन लगाया गया वह एक्टिवान 10 महीने पहले ही कालातीत (एक्सपायर) हो गई थी, इसलिए वह एक्टिवोन असर नहीं कर पाई और मादा सब एडल्ट बाइसन की मौत ताकतवर कैपटीवान के असर में घंटो रहने के कारण हो गई।

बाइसन तड़प तड़प कर दम तोड़ी होगी
वन्य प्राणी विशेष्ज्ञ बाताते हैं कि यदि बेहोशी से निकालने वाली एक्टिवोन का प्रयोग नहीं किया जाता है या वह कालातीत होने से अप्रभावी हो जाती है, तो बाइसन जैसे वन्यप्राणी को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। जैसे लंम्बे समय तक बेहोश रहने से सांस लेने की दर धीमी हो जाती है जिससे मौत हो जाती है। हृदय संबंधी जटिलताएं पैदा होती है जैसे रक्तचाप और हृदय गति पर असर, हृदयघात से मौत। लम्बे समय तक बेहोश रहने से वन्यप्राणी अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में असमर्थ हो जाते हैं ऐसी बहुत तकलीफों से मादा सब एडल्ट बाइसन की मौत हुई होगी।

क्या कहते है दस्तावेज
बेहोश करने वाली कैपटीवान और बेहोशी से निकालने वाली एक्टिवोन, दोनों दवाईयां साउथ अफ्रीका के वाइल्डलाइफ फार्मास्युटिकल्स से दिसम्बर 2022 में जंगल सफारी प्रबंधन ने बुलवाई थी। इसमें से बेहोशी से निकालने वाली दवा एक्टिवोन के बैच का नंबर 123040 था जिसकी चार शीशी (प्रत्येक 10 मिलीलीटर की) आई, जिनका सीरियल नंबर 12/283, 284, 285, 286 था। इनकी कालातीत होने का समय कंपनी ने मार्च 2024 बताया था। इनमे से बाइसन ट्रांसलोकेशन के लिए सीरियल नंबर 12/283 और 284 कालातीत होने के नौ माह बाद जंगल सफारी प्रबंधन ने 27 दिसम्बर 2024 को बलोदा बाजार वनमण्डल भेजी, जहाँ बारनवापारा अभ्यारण आता है। 25 जनवरी 2025 को बाइसन को बारनावापारा अभ्यारण में बेहोश करने के बाद बेहोशी से निकालने के लिए इनमे से कालातीत एक्टिवोन का प्रयोग किया गया।

वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने इनके पूरे दस्तावेज शासन को भेजते हुए मृत बाइसन को न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) से आग्रह किया है कि वो जनता को बतायें कि कालातीत दवाई का उपयोग क्यों किया गया जिससे बाइसन मर गया? वो कौन था जिसने जंगल सफारी से कालातीत दवाई बलोदा बाज़ार वनमण्डल को भेजी? वो डॉक्टर कौन था जिसने कालातीत दवाई बाइसन को लगाईं? उन्होंने यह भी पूछा कि बारनावापारा अभ्यारण से गुरु घासीदास नेशनल पार्क 40 बाइसन भेजने की अनुमति 2018 में मिली थी उसके बाद चार साल में कोई कार्यवाही नहीं हुई फिर जनवरी 2023 में किस अधिकारी ने इसे अपना ड्रीम प्रोजेक्ट बनाया जिसके कारण बाइसन की मौत हुई?

बहरहाल मादा सब एडल्ट बाइसन की मौत तो हो गई हैं पर इन सारे सवालों के जवाब आने से उम्मीद की जा सकती हैं की बेजुबान मृत बाइसन को न्याय मिल सकेगा ,

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