झीरम कांड पर फिर राजनीतिक बवाल, कांग्रेस ने कहा- जेपी नड्डा से NIA करे पूछताछ; सरेंडर नक्सलियों से जांच की दें अनुमति
रायपुर। झीरम घाटी नक्सल हमला फिर चर्चा में है. जांजगीर में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बयान के बाद कांग्रेस भाजपा और केंद्र सरकार पर हमलावर है. दरअसल, जेपी नड्डा ने हमले में “अंदर के लोगों की संलिप्तता” का दावा किया. इस पर कांग्रेस जेपी नड्डा से माफी की मांग कर रही है.
कांग्रेस का आरोप है कि उनके शीर्ष नेताओं को सुनियोजित तरीके से गोलियों से भूना गया, जिसके ठोस प्रमाण भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के पास मौजूद हैं. पार्टी ने मांग की है कि NIA इस मामले में निष्पक्ष पूछताछ करे, सरेंडर कर चुके नक्सलियों से जांच की सरकार अनुमति दे और यह स्पष्ट किया जाए कि भाजपा ने अदालत में याचिका दायर कर इस मामले की जांच आखिर क्यों रुकवाई.
क्या है मामला: जांजगीर-चांपा में आयोजित जनादेश कार्यक्रम के दौरान जेपी नड्डा ने कहा कि झीरम घाटी नक्सली हमले में अंदर के लोग शामिल थे, जिसके कारण कांग्रेस के नेताओं की हत्या हुई. नड्डा के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई. कांग्रेस का कहना है कि बिना किसी ठोस प्रमाण के इस तरह का बयान न केवल राजनीतिक है, बल्कि उन शहीदों की शहादत पर सीधा सवाल खड़ा करता है, जिन्होंने लोकतंत्र के लिए अपनी जान गंवाई.
‘झूठ का अड्डा, जेपी नड्डा’: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नड्डा के बयान को अपमानजनक बताया. उन्होंने लिखा कि भाजपा के ‘पर्ची राष्ट्रीय अध्यक्ष’ जेपी नड्डा ने छत्तीसगढ़ आकर झीरम के शहीदों का अपमान किया है. भूपेश बघेल ने कहा कि यदि नड्डा के पास अपने आरोपों के सबूत हैं, तो NIA और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को उनसे तत्काल पूछताछ करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके दावे का आधार क्या है.
जांच क्यों रोकी गई?: भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जब झीरम नक्सली हमले के पीछे के षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही थी, तब अदालत में याचिका लगाकर जांच को क्यों रोका गया. उन्होंने पूछा कि आखिर किसे सच्चाई सामने आने से डर था और कौन षड्यंत्रकारियों को बचाना चाहता था. भूपेश ने यह भी कहा कि अब जब झीरम कांड में शामिल कई नक्सली हिरासत में हैं या सरेंडर कर चुके हैं, तो उनसे साजिश के बारे में पूछताछ क्यों नहीं हो रही.
‘नक्सलियों से लड़िए, राजनीति मत कीजिए’: भूपेश बघेल ने कहा कि नक्सलवाद से लड़ना सभी का साझा उद्देश्य है. उन्होंने दावा किया कि जिस रास्ते पर चलकर आज नक्सलवाद कमजोर हो रहा है, उसकी नींव कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में रखी गई थी. उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि 15 साल की सरकार के दौरान नक्सलवाद खत्म करने में वह विफल रही, जबकि उस समय बड़े पैमाने पर हिंसा, जनसंहार और गांवों के उजड़ने की घटनाएं हुईं.
दीपक बैज बोले, शहीद परिवारों से माफी मांगें: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने जेपी नड्डा के बयान को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया. उन्होंने कहा कि नड्डा को सबसे पहले झीरम घाटी में शहीद हुए नेताओं के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए. बैज ने याद दिलाया कि झीरम की घटना के समय प्रदेश में 15 साल से भाजपा की सरकार थी और परिवर्तन यात्रा के दौरान पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा पहले से धमकी भरी चिट्ठी जारी किए जाने के बावजूद सुरक्षा में लापरवाही बरती गई.
सरेंडर नक्सलियों से पूछताछ का सवाल: दीपक बैज ने कहा कि झीरम कांड में शामिल कई नक्सली आज सरेंडर कर चुके हैं, इसके बावजूद उनसे साजिश के बारे में पूछताछ नहीं की जा रही है. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि सरकार सच जानना चाहती है तो इन सरेंडर नक्सलियों से पूछताछ क्यों नहीं कर रही. कांग्रेस ने यहां तक कहा कि यदि सरकार खुद पहल नहीं कर रही है, तो कांग्रेस नेताओं को अनुमति दी जाए ताकि वे सच्चाई जान सकें.
विकास उपाध्याय ने कहा, भाजपा ने सुरक्षा नहीं दी: पूर्व विधायक और पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि झीरम घाटी में कांग्रेस की सर्वोच्च लीडरशिप शहीद हुई थी, उस समय भी राज्य में भाजपा की सरकार थी. उन्होंने आरोप लगाया कि परिवर्तन यात्रा के दौरान लगातार सुरक्षा की मांग के बावजूद सरकार ने कोई ठोस व्यवस्था नहीं की. उपाध्याय ने कहा कि नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं को गोलियों से भून दिया और आज भाजपा उसी घटना पर राजनीति कर रही है.
NIA से नड्डा की पूछताछ की मांग: कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रदेश अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जेपी नड्डा का यह कहना कि कांग्रेस ने अपने ही नेताओं को मरवाया, बेहद आपत्तिजनक और शर्मनाक है. उन्होंने मांग की कि NIA को नड्डा से पूछताछ करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके पास इस बयान के समर्थन में क्या सबूत हैं. शुक्ला ने कहा कि यदि नड्डा के पास कोई तथ्य नहीं है, तो उन्हें तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और भाजपा को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
झीरम घाटी नक्सली हमला छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे दर्दनाक अध्याय रहा है. जेपी नड्डा के बयान ने इस जख्म को फिर से हरा कर दिया है. कांग्रेस इसे शहीदों का अपमान बता रही है, जबकि भाजपा इसे राजनीतिक आरोप मान रही है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नड्डा अपने दावों के सबूत सामने लाते हैं या यह मामला सियासी आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाता है.
