January 22, 2026

भगवान शिव का प्रिय श्रावण मास शुरू, जानिए सावन सोमवार की तिथि और शिव आराधना का महत्व

SAWAN11

रायपुर। श्रावण माह की शुरुआत होते ही शिवालयों में ओम नम: शिवाय, हर हर महादेव, बम बम भोले की गूंज सुनाई देने लगी है. भक्त सुबह से शिव मंदिर पहुंचकर भोले की भक्ति में डूब गए हैं. दूध, दही, शहद, घी, जल, बेलपत्र, फूल अर्पित कर भगवान भोले को हर कोई प्रसन्न करने में लगा है.

सावन में क्यों होती है भगवान शिव की पूजा: भगवान भोलेनाथ प्रकृति के देवता माने जाते हैं. इसलिए सावन माह में प्रकृति की पूजा के रूप में महादेव की पूजा की जाती है. प्रकृति से हमें सब कुछ मिलता है. सनातन परंपरा में प्रकृति पूजा को सर्वोच्च बताया गया है. इसलिए सावन के महीने में प्रकृति के देवता भगवान शिव की पूजा होती है.

पुराणों ने ये भी बताया गया है कि सावन महीने में ही भगवान भोलेनाथ ने विषपान किया था. इसके बाद उन्हें शांत करने के लिए बारिश के देवता इंद्र ने उनपर वर्षा की. यहीं वजह है कि कांवड़िए नदियों का जल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं. ये भी कहा जाता है कि घोर तपस्या के बाद श्रावण मास में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पाया.

पहला सावन सोमवार कब: सावन महीने में इस बार चार सोमवार पड़ रहे हैं. सावन माह शुरू होने के बाद पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ रहा है. दूसरा सोमवार 21 जुलाई को, तीसरा सोमवार 28 जुलाई और चौथा और आखिरी सोमवार 4 अगस्त को पड़ रहा है. 9 अगस्त को श्रावण मास खत्म हो जाएगा.

सावन में शिव पूजा: कहा जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना बहुत आसान है. वे बहुत ही आसान पूजा से अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. सावन माह में भगवान भोले को प्रसन्न करने के लिए सुबह सबसे पहले स्नान ध्यान करें. साफ कपड़े पहने. भगवान शिव को समर्पित वैदिक मंत्रों का जाप कर शिव आराधना करें. देसी घी का दीया जलाए और ओम नम: शिवाय का जाप करे. इस दिन कई लोग शिव चालीसा का पाठ भी करते हैं. मंदिर में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जल, दूध, दही ,घी, शक्कर, धतूरा और कनेर के फूल चढ़ाए जाते हैं. भगवान शिव की कृपा पाने के लिए इस दिन कई लोग रुद्राभिषेक भी कराते हैं. जिससे भगवान भोलेनाथ भक्तों की मनोकामना पूरी करने के साथ ही मनवांछित फल भी देते हैं.

छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शिव मंदिर:

देवबलोदा शिव मंदिर: भिलाई से करीब 4 किलोमीटर की दूरी पर यह मंदिर है. कल्चुरी कालीन (12 वीं से 13वीं शताब्दी ) का यह मंदिर है. शिवरात्रि पर यहां मेला लगता है.
सुरंग टीला मंदिर: यह मंदिर महासमुंद जिले के सिरपुर में है. यह 7 वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर है.
भूतेश्वरदेव महादेव: यह मंदिर गरियाबंद में है. शिवलिंग की ऊंचाई में हर साल बढ़ोतरी हो रही है.
लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर: यह मंदिर जांजगीर जिले के शिवरीनारायण में है. यह 6 वीं शताब्दी में बना था. यहां स्थित शिवलिंग में एक लाख छिद्र हैं, इसीलिये इसका नाम लक्षलिंग भी है.
भोरमदेव मंदिर: कबीरधाम जिले में स्थिय शिव मंदिर करीब एक हजार वर्ष पुराना है. गर्भगृह में काले पत्थर से बना शिवलिंग है.
कुलेश्वर मंदिर: यह मंदिर राजिम में है. यह 9वीं शताब्दी का मंदिर है.
पातालेश्वर/केदारेश्वर महादेव: यह बिलासपुर जिले के मल्हार में स्थित है. कल्चुरी काल में 10वीं से 13वीं सदी में इस मंदिर का निर्माण हुआ था.

छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय संरक्षित शिव मंदिर
अडभार मंदिर (भग्न शिव मंदिर), जांजगीर चांपा (7वीं शताब्दी)
महादेव मंदिर पाली, कोरबा (8वीं से 9 वीं शताब्दी)
पातालेश्वर महादेव मंदिर मल्हार, बिलासपुर (12वीं शताब्दी)
महादेव मंदिर बस्तर, जगदलपुर (12वीं शताब्दी)
महादेव मंदिर नारायणपुर, बलौदाबाजार (13वीं से 14वीं शताब्दी)
प्राचीन शिव मंदिर देवबलोदा, दुर्ग (13वीं शताब्दी)
शिव मंदिर गतौरा, बिलासपुर (14-15 वीं शताब्दी)
महादेव मंदिर बेलपान, बिलासपुर (16वीं शताब्दी)

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