January 22, 2026

छत्तीसगढ़ का पंडुम कैफे, जहां हर कप एक कहानी कहता है, AK-47 चलाने वाले हाथ परोस रहे कॉफी

PANDUM CM1

रायपुर। सोचिए, आप एक कैफे में बैठे हैं। आपने कॉफी ऑर्डर की है, जिसे सर्व करने एक वेटर आपकी टेबल पर आता है। आप सुकून से बैठकर कॉफी पीते हैं, तभी आपको पता चलता है कि जो हाथ आपकी टेबल पर कॉफी सर्व कर रहे थे, वो कभी AK-47 चलाते थे और जंगलों में आईईडी बिछाते थे। जी हां! यह छत्तीसगढ़ सरकार की एक नई पहल है। छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने जगदलपुर में ‘पंडुम कैफ़े’ का उद्घाटन कर बस्तर में सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई शुरुआत की है।

यहां कर्मचारी हैं पूर्व नक्सली और पीड़ित
यह कैफ़े नक्सली हिंसा के पीड़ितों और आत्मसमर्पण कर चुके लोगों को पुनर्वासित करने और उन्हें सम्मानजनक आजीविका प्रदान करने की छत्तीसगढ़ सरकार की एक अहम पहल है। ‘पंडुम कैफ़े’ जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में खोला गया है। मुख्यमंत्री साय ने कैफ़े में काम कर रहे नारायणपुर की फगनी, सुकमा की पुष्पा ठाकुर, बीरेंद्र ठाकुर, बस्तर की आशमती और प्रेमिला बघेल से मुलाकात भी की।

प्रशासन ने दी है स्पेशल ट्रेनिंग
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘पंडुम कैफ़े’ का खुलना बस्तर में नक्सलवाद के खत्म होने की दिशा में हो रहे सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह कैफ़े आशा, प्रगति और शांति का प्रतीक है। कैफ़े में काम करने वाले युवा, जो कभी नक्सली हिंसा का हिस्सा थे या उसके पीड़ित थे, अब शांति के रास्ते पर हैं। जिला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें हॉस्पिटैलिटी, कैफ़े मैनेजमेंट, ग्राहक सेवा, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और उद्यमिता जैसे कई क्षेत्रों में ट्रेनिंग दी है।

सरकार की पहल से बदली जिंदगी
हिंसा का रास्ता छोड़कर कैफ़े में काम कर रही एक महिला ने भावुक होकर बताया कि इस पुनर्वास पहल से उनकी ज़िंदगी कितनी बदल गई है। एक पूर्व माओवादी कैडर ने कहा, ‘हमने अपने अतीत में अंधेरा देखा था। आज हमें समाज की सेवा करने का यह अवसर मिला है, यह हमारे लिए एक नया जन्म है। बारूद की जगह कॉफी परोसना और अपनी मेहनत की कमाई से जीना—यह एहसास हमें शांति और सम्मान दे रहा है।’

कैफे से मिल रहा अच्छा जीवन
एक अन्य सहयोगी ने अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा, ‘पहले हम अपने परिवार को अच्छा जीवन देने का सपना भी नहीं देख सकते थे। अब हम अपनी मेहनत से कमाए पैसों से घर के सदस्यों का भविष्य संवार सकते हैं। यह सब प्रशासन और इस कैफ़े की वजह से संभव हुआ है।’

प्रशासन ने जीता भरोसा
एक और सदस्य ने समुदाय के सहयोग पर ज़ोर देते हुए कहा, ‘हमें लगा था कि मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होगा, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन ने हमें प्रशिक्षण दिया और हमारा विश्वास जीता। सबसे बड़ी बात यह है कि हम अब पीड़ितों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे हमें अपने अतीत के अपराधों को सुधारने और शांति स्थापित करने का अवसर मिला है।’

दिलचस्प है कैफे की टैगलाइन
उन्होंने यह भी बताया कि ‘पंडुम’ बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है। कैफ़े की टैगलाइन ‘जहां हर कप एक कहानी कहता है’ इस बात का प्रतीक है कि यहां परोसी जाने वाली कॉफी सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि साहस, संघर्ष पर जीत और एक नई शुरुआत की कहानी भी बताती है।

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