January 23, 2026

बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश कुमार अब नहीं रहे ‘बड़े भाई’, NDA टिकट बंटवारे में कैसे घटा JDU का कद?

NITISH

पटना। बिहार में नीतीश कुमार चाहे जिस गठबंधन में रहे हों हमेशा बड़े भाई भूमिका में ही रहे हैं.भाजपा के साथ अब तक सभी चुनावों में भाजपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ते रहे हैं. पहली बार भाजपा उन्हें अपनी बराबरी पर लेकर आई है.अब ना सिर्फ बाकी सहयोगियों की कमान भाजपा के हाथ में है बल्कि जदयू भी अब भाजपा से ही निर्देशित हो रही है. अब नेतृत्वकर्ता की भूमिका में भाजपा है.

दरअसल बीजेपी के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने जैसे ही सीट शेयरिंग का ऐलान किया. उसके बाद से इसकी चर्चा शुरू हो गई. इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जदयू के बराबर सीटें मिली हैं. एक तरह से जदयू की कमान में अब भाजपा के ही हाथ में रहेगी. इस बार बीजेपी और जेडीयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.चिराग की पार्टी एलजेपी (रामविलास) ने 29 सीटों पर अपना दम दिखाएगी. इसके अलावा जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा को 6-6 सीटों से संतोरष करना पड़ा है.

2005 से 2020 तक ज्यादा सीटों पर लड़ी जदयू
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू ने138 सीटों पर लड़ी, वहीं भाजपा को 102 सीटें दी गई थीं. 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 141 और भाजपा ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा. 2020 के चुनाव में सीट बंटवारे में जदयू को 115 सीटें और भाजपा को 110 सीटें मिली थी. यह पहली बार है जब दोनों दल बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.

पीएम मटेरियल नीतीश कुमार का घटा कद
इस बराबरी के बंटवारे ने नीतीश कुमार के घटते कद को जताया है. यह भी दिख रहा है कि कभी बिहार में पीएम मटेरियल माने जाने वाले नीतीश अब भाजपा की शर्तों पर गठबंधन में शामिल हैं.भाजपा अब गठबंधन की बागडोर अपने हाथ में ले चुकी है. 2025 का यह सीट बंटवारा इस बात का प्रतीक है कि नीतीश अब बड़े भाई नहीं रहे. ऐसे में यह भी कहा जा सकता है कि आने वाले चुनाव में अगर एनडीए की सरकार बनती है तो क्या नीतीश कुमार दोबारा मुख्यमंत्री बने पाएंगे.

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