नया रायपुर सेंध लेक में वेटलैंड नियमों की अनदेखी, जलाशयों में अवैध निर्माण की कोर्ट में होगी शिकायत
रायपुर। नया रायपुर के झांझ और सेंध जलाशय में वेटलैंड नियमों की अनदेखी करते हुए करीब 55 करोड़ रुपये के अवैध निर्माण किए गए हैं. इस पर राज्य वेटलैंड प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है और रायपुर कलेक्टर को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत कोर्ट में परिवाद दर्ज करने का आदेश दिया है.
आदेश में क्या कहा गया है?: वेटलैंड प्राधिकरण ने कलेक्टर को कहा है कि वे अधिनियम की धारा 19 के तहत सक्षम न्यायालय में परिवाद दायर करें. दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की सजा या ₹1 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
निर्माण कार्य जैव विविधता के लिए नुकसान: जुलाई 2023 की जांच में सामने आया कि झांझ जलाशय में 13.69 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य हुए. इसमें पाथवे, पुलिया, रिटेनिंग वॉल और वृक्षारोपण शामिल थे. यह निर्माण जलाशय की जल धारण क्षमता और जैव विविधता के लिए नुकसानदेह माने गए.
सेंध जलाशय में और भी बड़ा निर्माण: झांझ की तरह सेंध जलाशय में 41.79 करोड़ रुपये के निर्माण हुए. इनमें शॉप, पार्किंग शेड और व्यावसायिक संरचनाएं थीं. जांच में बताया गया कि इन निर्माणों ने वेटलैंड को गैर-वेटलैंड क्षेत्र में बदल दिया और जल प्रवाह भी बाधित हुआ.
एनआरडीए ने नहीं मानी जांच समिति की बात: जुलाई 2023 में वेटलैंड जांच समिति ने कार्यों पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद भी मार्च 2024 में एनआरडीए ने फिर से ₹15.34 करोड़ का कार्यादेश जारी कर निर्माण कार्य पूरे करवा दिए.
डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर हुई कार्रवाई: यह पूरा मामला ईएनटी विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत के बाद सामने आया. उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट कलेक्टर द्वारा दबा दी गई और मई 2025 में वेटलैंड प्राधिकरण को भेजी गई.
बाकी तालाबों की जांच में लापरवाही: डॉ. गुप्ता ने आरोप लगाया है कि रायपुर के अन्य प्रमुख तालाबों जैसे बूढ़ा तालाब, तेलीबांधा, महाराजबंद आदि की जांच अभी तक नहीं हुई है. यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई नगर निगम अधिकारी कानूनी दाव-पेंच में फंस सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट रख रहा है नजर: वेटलैंड प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट स्वयं वेटलैंड मामलों की निगरानी कर रहा है और राज्य सरकारों को हर कार्रवाई की जानकारी देनी होती है.
जागरूकता अभियान और कार्यशाला: डॉ. गुप्ता के प्रयासों से जून 2025 में रायपुर में राष्ट्रीय वेटलैंड कार्यशाला आयोजित हुई. इसमें ‘वेटलैंड मित्र’ जैसी पहल शुरू की गई जिससे आम लोग भी वेटलैंड संरक्षण में भाग ले सकें.
नया रायपुर के वेटलैंड घोटाले ने लापरवाही और पर्यावरणीय अनदेखी को उजागर किया है. ये लापरवाही जैव विविधता के लिए खतरनाक है.
