January 20, 2026

BJP जिसे बता रही थी शराब घोटाले का आरोपी, साय सरकार ने उसी रिटायर्ड IAS को बना दिया मुख्य सूचना आयुक्त

JAINNN

रायपुर। पूर्व सीएस अमिताभ जैन सोमवार को छत्तीसगढ़ के नए मुख्य सूचना आयुक्त बन गए. लोकभवन में पूर्व मुख्य सचिव (सीएस) अमिताभ जैन ने दो सूचना आयुक्त के साथ शपथ ली. अमिताभ जैन के शपथ के साथ ही राज्य में सियासत शुरू हो गई है. कांग्रेस ने कहा है अमिताभ जैन की नियुक्ति से साफ़ है कि राज्य में शराब घोटाला हुआ ही नहीं था. ये सिर्फ़ कांग्रेस सरकार और नेताओं को को बदनाम व परेशान करने वाला षड्यंत्र था.

भाजपा नेता ने जैन के खिलाफ पीएमओ को लिखी थी चिट्ठी
पूर्व सीएस अमिताभ जैन छत्तीसगढ़ में मुख्य सूचना आयुक्त क्या बने विपक्ष ने शराब घोटाले को एक बार फिर षड्यंत्र करार दिया है. दरअसल, छत्तीसगढ़ में बीजेपी सरकार बनने के बाद अमिताभ जैन सीएस बने रहे, जिस पर सबसे पहले बीजेपी नेता नरेश गुप्ता ने पीएमओ को शिकायत कर जांच की मांग की थी. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि भूपेश बघेल सरकार में अमिताभ जैन 2020 में सीएस बने और उनके रहते ही राज्य में शराब घोटाला हुआ. उन्होंने ने अपने शिकायती पत्र में लिखा था की cgsmcl के अध्यक्ष सीएस अमिताभ जैन थे. उनकी जानकारी के बगैर शराब घोटाला हो ही नहीं सकता था, इसलिए उनकी भूमिका की जांच की जानी चाहिए.

अमिताभ जैन की नियुक्ति पर सवाल ही सवाल
अमिताभ जैन की नियुक्ति को RTI एक्टिविस्ट राकेश चौबे ने भी अवैध बताया है. उनका कहना मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति ही नियम विरुद्ध है. अमिताभ जैन का CIC के लिए साक्षात्कार उनके सीएस रहते ही हुआ और उनके कनिष्ठ अधिकारी ने इंटरव्यू लिया, जो नियम विरुद्ध है. वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय ठाकुर ने भी उनकी नियुक्ति को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हुए कहा कि अमिताभ जैन की नियुक्ति से साफ़ है कि राज्य में शराब घोटाला हुआ ही नहीं था. ये सिर्फ़ कांग्रेस सरकार और नेताओं को बदनाम व परेशान करने वाला षड्यंत्र था.

भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज
हालांकि, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा है कि नियम के तहत ही नियुक्ति हुई है. बीजेपी नेता राजीव चक्रवर्ती ने कांग्रेस के बयान को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस का तो काम ही है सवाल उठाना.

CIC के पद पर अमिताभ जैन को लेकर एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो चुकी है. कांग्रेस को मौका मिल गया कि छत्तीसगढ़ में कोई शराब घोटाला हुआ ही नहीं था. ये सिर्फ कांग्रेस को बदनाम करने का षड्यंत्र था. अब देखना ये होगा कि इस नियुक्ति से किसे कितना लाभ होता है.

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