13 सालों से अटका RTE में राशि बढ़ोतरी का मामला, प्राइवेट स्कूलों का सरकार को अल्टीमेटम, HC के आदेश के बावजूद शिक्षा विभाग बेपरवाह
रायपुर। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार की उदासीनता अब खुलकर सवालों के घेरे में है. छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने स्कूल शिक्षा मंत्री को अंतिम निवेदन पत्र सौंपते हुए चेताया है कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में असहयोग आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा.
13 साल से अटका शिक्षा के अधिकार कानून का मुआवज़ा
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने पत्र में स्पष्ट किया है, कि हाईकोर्ट बिलासपुर (WPC 4988/2025) ने 19 सितंबर 2025 को अपने आदेश में 6 माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग ने अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया. यह स्थिति न सिर्फ न्यायालय की अवहेलना मानी जा रही है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ सीधा अन्याय भी है.
RTE मुआवज़ा 13 सालों से जस का तस
निजी स्कूलों के प्रबंधन का आरोप है कि पिछले 13 वर्षों से RTE के तहत मिलने वाली राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि इसी अवधि में महंगाई, वेतन और अन्य खर्चों में कई गुना इज़ाफा हुआ है.
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की मांगें
प्राथमिक स्तर: ₹7,000 से बढ़ाकर ₹18,000 किया जाए
माध्यमिक स्तर: ₹11,500 से बढ़ाकर ₹22,000 किया जाए
हायर सेकेंडरी: ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया जाए
बढ़ी हुई राशि को पिछले 3 वर्षों से लागू किया जाए

नेताओं-अफसरों की सैलरी बढ़ी, शिक्षा और उससे जुड़े सस्थान क्यों उपेक्षित?
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने पत्र में तुलनात्मक आंकड़े देते हुए कहा है कि 2012 से 2025-26 के बीच विधायकों का वेतन ₹45,000 से बढ़कर ₹1.60 लाख हो गया. IAS अधिकारियों का वेतन ₹45,000 से बढ़कर ₹1 लाख से अधिक हो गया, लेकिन गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर खर्च करने में सरकार का रवैया जस का तस बना है
गरीब बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि RTE के तहत पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थियों की शिक्षा पर होने वाले वास्तविक खर्च से सरकार आंखें मूंदे बैठी है. निजी स्कूल अपनी जेब से खर्च उठाने को मजबूर हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों का संचालन दोनों प्रभावित हो रही है.
अब आंदोलन की तैयारी में प्राइवेट स्कूल प्रबंधन
प्राइवेट स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है, कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन प्रदेशव्यापी असहयोग आंदोलन शुरू करने पर विचार करेगा. इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी।.
सवाल वही सरकार कब जागेगी?
हाई कोर्ट का आदेश और लगातार आवेदन और अब अंतिम निवेदन इसके बावजूद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है. क्या RTE सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गया है? क्या गरीब बच्चों की शिक्षा सरकार की प्राथमिकता से बाहर हो चुकी है ?
