March 27, 2026

जग्गी हत्याकांड फिर खुला : सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 1 अप्रैल को होगा बड़ा फैसला

jaggi

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी गलियारों में हलचल मचाना शुरू कर दिया है। सालों पुराना यह मामला अब दोबारा बिलासपुर हाईकोर्ट में खुल गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आज बुधवार 25 मार्च को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में इस केस की सुनवाई हुई। जहां पीड़ित परिवार की ओर से सतीश जग्गी भी मौजूद रहे। अदालत ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।

पहले भी आ चुका है मामला
यह मामला पहले भी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में आ चुका है, जहां आज से करीब दो साल पहले दोषियों की अपील खारिज कर उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार करते हुए मामले को फिर से हाईकोर्ट भेज दिया, ताकि पूरे केस की मेरिट पर विस्तार से सुनवाई हो सके।

सीबीआई को सौंपी थी जांच
इस हत्याकांड मामले में शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगे थे, ऐसे में जब नाराजगी बढ़ी तो इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई की जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों के नाम सामने आए, जिन पर हत्या और साजिश रचने के आरोप लगाए गए।

क्या है मामला?
यह पूरा मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में कुछ आरोपी सरकारी गवाह बन गए, जबकि कई को सजा सुनाई गई। हालांकि, 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था।

इस फैसले को चुनौती देने के लिए जग्गी के बेटे सतीश जग्गी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनका आरोप है कि यह हत्या तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़ी एक साजिश थी। जांच के दौरान सबूतों को प्रभावित किया गया। उनके वकील ने अदालत में दलील दी कि ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष सबूत ही नहीं, बल्कि पूरे षड्यंत्र को समझना भी जरूरी है।

कौन थे रामावतार जग्गी?
रामावतार जग्गी सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति का अहम चेहरा थे। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। उनके साथ ही एनसीपी में शामिल हुए थे। उस दौर में राज्य की राजनीति काफी उथल-पुथल भरी थी, और इसी बीच उनकी हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अब जब यह मामला एक बार फिर अदालत में है, तो न केवल जग्गी परिवार बल्कि पूरे प्रदेश की नजरें 1 अप्रैल पर टिकी हैं।

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