March 28, 2026

CG : 165 करोड़ के भिलाई यस बैंक घोटाले में हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, CBI जांच के आदेश से बढ़ी हलचल

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 165 करोड़ रुपये के भिलाई यस बैंक घोटाले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच प्रक्रिया पर गंभीर नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी CBI से कराने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब तक की जांच में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव नजर आता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में तथ्यों को छुपाने और जांच के नाम पर लीपापोती की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए CBI ही एकमात्र विकल्प है।

क्या है पूरा मामला
भिलाई स्थित यस बैंक शाखा में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। करीब 165 करोड़ रुपये के इस घोटाले में संदिग्ध लेनदेन और दस्तावेजों में गड़बड़ी की बात सामने आई है। आरोप है कि जांच के दौरान कई अहम तथ्यों को छुपाया गया, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

राज्य सरकार की जांच पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की जांच पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने कहा कि जांच प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है और उसमें अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दी। कोर्ट ने यह भी माना कि इतने बड़े आर्थिक घोटाले में इस तरह की ढीली जांच से सच्चाई सामने नहीं आ सकती और दोषियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

यस बैंक की भूमिका पर भी नाराजगी
हाई कोर्ट ने यस बैंक के रवैये पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट के अनुसार, बैंक ने जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं किया और कई महत्वपूर्ण जानकारियां छुपाई गईं। विशेष रूप से सुपेला, भिलाई शाखा में खोले गए खातों से जुड़े लेनदेन की पूरी जानकारी जांच एजेंसियों को नहीं दी गई, जिससे जांच प्रभावित हुई।

CBI को सौंपा गया पूरा मामला
कोर्ट ने दुर्ग-भिलाई के एसपी को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, एफआईआर और काउंटर एफआईआर सहित पूरी जानकारी तत्काल CBI को सौंपी जाए। साथ ही CBI को निर्देशित किया गया है कि वह इस मामले में नई FIR दर्ज कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच शुरू करे। अनिमेष सिंह द्वारा दर्ज FIR और हितेश चौबे की काउंटर FIR की विस्तृत जानकारी भी CBI को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।

याचिकाकर्ता और कानूनी पक्ष
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों को महत्वपूर्ण माना। इस मामले में अधिवक्ता बीपी सिंह ने पैरवी की, जबकि अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने सहयोग किया। वरिष्ठ अधिवक्ता बादशाह प्रसाद सिंह भी मामले से जुड़े रहे। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि बैंक ने लेनदेन की पूरी जानकारी नहीं दी और जांच एजेंसियों को अधूरी व भ्रामक सूचनाएं दी गईं, जिसके चलते कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।

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