January 22, 2026

भारत में 21 करोड़ लोगों का ब्लड प्रेशर कंट्रोल से बाहर, WHO ने दी चेतावनी

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भारत में हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी एक गंभीर समस्या बन गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हाई ब्लड प्रेशर पर दूसरी वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 30-79 आयु वर्ग की कम से कम 30 फीसदी वयस्क आबादी हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित है, जो 21 करोड़ से ज्यादा लोगों के बराबर है. यह दर वैश्विक औसत 34 फीसदी से थोड़ी कम है. हालांकि, भारत में 17.3 करोड़ से ज्यादा लोगों का हाई ब्लड प्रेशर अनियंत्रित है, क्योंकि केवल 39 फीसदी लोग ही अपनी स्थिति के बारे में जानते हैं और उनमें से भी बहुत कम लोग अपने ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर पाते हैं

कहने का मतलब है कि 30 से 79 वर्ष की आयु के 21 करोड़ से ज्यादा लोग भारत में इस बीमारी से पीड़ित हैं. यह आंकड़ा चिंताजनक है, क्योंकि यह देश की कुल आबादी के 30 फीसदी से भी ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अलावा, केवल 39 फीसदी लोगों को ही इस बीमारी के बारे में पता है, और 83 फीसदी लोगों का ब्लड प्रेशर अनियंत्रित है.

यह रिपोर्ट प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल लेवल पर हाई ब्लड प्रेशर की पहचान, इलाज और कंट्रोल को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डालती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, बांग्लादेश, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया ने हाई ब्लड प्रेशर की देखभाल को Universal health coverage (UHC) में एकीकृत कर दिया है. यह प्रगति प्राथमिक देखभाल और सामुदायिक सहभागिता में निवेश के माध्यम से हासिल की गई है.

भारत में रिस्क फैक्टर्स
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नमक का अधिक सेवन, तंबाकू और शराब का सेवन और मोटापा हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स हैं. रिपोर्ट बताती है कि भारत में 30-79 वर्ष की उम्र के लगभग 21 करोड़ से अधिक लोग हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, जिनमें से अधिकांश का ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं है. भारत की हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल रेट केवल 17 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत 50 फीसदी है.

भारत में हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज कंट्रोल के लिए उठाए गए कदम
भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 30 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए देशव्यापी जांच और इलाज अभियान चलाया गया, जिसके तहत जनवरी से जून 2025 तक 1.11 करोड़ से अधिक लोगों को हाई ब्लड प्रेशर और 64 लाख से अधिक लोगों को डायबिटीज का निदान किया गया. निदान किए गए सभी मामलों का सक्रिय रूप से इलाज किया जा रहा है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है.

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य 30 वर्ष और उससे अधिक आयु के 100 फीसदी लोगों की non-communicable diseases (एनसीडी) के लिए जांच करना है, जो 20 फरवरी, 2025 से 31 मार्च, 2025 तक चला. 770 जिला एनसीडी क्लीनिक, 233 हार्ट केयर यूनिट और 6410 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर लेवल एनसीडी क्लीनिक सहित व्यापक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया गया है, जिन्हें रेगुलर फॉलो-अप एक्शन, सलाह और फ्री दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित सीएचओ, आशा और एएनएम द्वारा सहायता प्रदान की जाती है.

भारत की पहल आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से सामुदायिक पहुंच पर केंद्रित है, जो कम्युनिटी बेस्ड असेसमेंट चेकलिस्ट (सीबीएसी) उपकरण का उपयोग करती है, जिससे खतरे का तुरंत आकलन संभव होता है, जबकि चिकित्सा कर्मचारी रोगियों को निरंतर शिक्षा, जीवनशैली में बदलाव और आवश्यकता पड़ने पर विशेष देखभाल के लिए रेफरल सुनिश्चित करते हैं.

ग्लोबल सिनेरियो
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 1.4 अरब लोग हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित थे, लेकिन केवल पांच में से एक ही इसे दवाओं या जीवनशैली में बदलाव के जरिए कंट्रोल कर रहा था, जबकि केवल 28 फीसदी निम्न-आय वाले देशों में WHO-अनुशंसित दवाएं उपलब्ध थीं.

हाई ब्लड प्रेशर हार्ट रेट रुकने, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी डिजीज और मनोभ्रंश का एक प्रमुख कारण है, जिसे लाइफस्टाइल में बदलाव और दवाओं से रोका या ठीक किया जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि यदि इस पर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो लाखों लोग असमय मर सकते हैं और देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2011 से 2025 तक हृदय संबंधी बीमारियों (हाई ब्लड प्रेशर सहित) से निम्न और मध्यम आय वाले देशों को लगभग 3.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान होने का अनुमान है, जो उनके (GDP) का लगभग 2 फीसदी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने यह भी बताया कि हर घंटे हाई ब्लड प्रेशर के कारण 1000 से अधिक लोग स्ट्रोक और दिल के दौरे से मर जाते हैं, जिनमें से अधिकांश मौतें रोकी जा सकती हैं.

उन्होंने कहा कि देशों के पास हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के साधन हैं, जिसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, निरंतर निवेश और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (Universal Health Coverage) के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है. इसके माध्यम से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है.

ब्लड प्रेशर की रोकथाम आने वाली बाधाएं
यह रिपोर्ट हाई ब्लड प्रेशर की रोकथाम,डायग्नोसिस, इलाज और लॉन्ग टर्म केयर में बड़ी कमियों को उजागर करती है. प्रमुख बाधाओं में कमजोर हेल्थ प्रमोशन पॉलिसी (शराब, तंबाकू का सेवन, फिजिकल एक्टिविटी, नमक और ट्रांस फैट जैसे रिस्क फैक्टर्स), सर्टिफाइड ब्लड प्रेशर डिवाइस तक सीमित पहुंच, स्टैंडराइज ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित प्राथमिक देखभाल टीमों का अभाव, Unreliable supply chains और महंगी दवाएं, रोगियों के लिए Inadequate financial security और रुझानों की निगरानी के लिए अपर्याप्त इंफॉर्मेशन सिस्टम शामिल हैं.

देशों के स्तर पर प्रगति
बांग्लादेश, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया ने हाई ब्लड प्रेशर की देखभाल को यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज (यूएचसी) में एकीकृत करके, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल में निवेश करके और समुदायों को शामिल करके काफी प्रगति की है. बांग्लादेश ने अपने आवश्यक स्वास्थ्य सेवा पैकेज में हाई ब्लड प्रेशर इलाज सेवाओं को शामिल करके और स्क्रीनिंग एवं फॉलो अप केयर को मजबूत करके 2019-2025 के बीच कुछ क्षेत्रों में हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 56 प्रतिशत कर दिया है.

फिलीपींस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के HEARTS तकनीकी पैकेज को देश भर में सामुदायिक स्तर की सेवाओं में प्रभावी रूप से शामिल किया है. दक्षिण कोरिया ने स्वास्थ्य सुधारों को एकीकृत किया है, जिसमें एंटी हाई ब्लड प्रेशर दवाओं की कम लागत और रोगी शुल्क को सीमित करना शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप 2022 में नेशनल लेवल पर ब्लड प्रेशर कंट्रोल रेट 59 प्रतिशत के साथ हाई रही है.

भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की स्थिति बेहद खराब
वहीं, भारत के पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान, भूटान, श्रीलंका, नेपाल अपनी आबादी के बीच हाई ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या का सामना कर रहे हैं. पाकिस्तान में, हाई ब्लड प्रेशर (30-79 वर्ष की आयु के वयस्क) का प्रसार 42 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 34 प्रतिशत है. पाकिस्तान में 30-79 वर्ष की आयु के 38.6 मिलियन वयस्कों में से लगभग 33.9 मिलियन वयस्कों की स्थिति नियंत्रित नहीं है. भूटान में, इसी आयु वर्ग में हाई ब्लड प्रेशर का प्रसार 42 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 34 प्रतिशत है. 30-79 वर्ष की आयु के 166,000 वयस्कों में से लगभग 151,000 वयस्कों की स्थिति नियंत्रित नहीं है.

श्रीलंका में, इसी आयु वर्ग में उच्च रक्तचाप का प्रसार 40 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 34 प्रतिशत है.30-79 वर्ष की आयु के 47 लाख वयस्कों में से लगभग 38 लाख वयस्कों की स्थिति नियंत्रित नहीं है. नेपाल में, उच्च रक्तचाप का प्रसार 35 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 34 प्रतिशत है. 30-79 वर्ष की आयु के 48 लाख वयस्कों में से लगभग 44 लाख वयस्कों की स्थिति नियंत्रित नहीं है.

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