March 9, 2026

धान खरीदी और उठाव का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, बस्तर संभाग में सबसे अव्वल रहा कांकेर, विपक्ष जवाब से असंतुष्ट किया वॉकआउट

cg vidhansabha

रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिलान्तर्गत समोदा गांव में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार के फार्महाउस में अफीम की खेती का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से चर्चा के दौरान इस मामले में कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनने के बाद से ही हर प्रकार के अपराधों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच जारी है। यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि पुलिस ने करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में फैली अफीम की खेती से 14 लाख 30 हजार पौधों को जब्त किया है, जिनकी अनुमानित कीमत 7.88 करोड़ रुपए है। मामले में भाजपा नेता विनायक ताम्रकार (पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष, 58), विकास विश्नोई (27), मनीष ठाकुर और अचला राम जाट (28) को गिरफ्तार किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि फार्महाउस में राजस्थान के मजदूर काम कर रहे थे और सुरक्षा के लिए बाउंसर तैनात किए गए थे।

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और गृहमंत्री विजय शर्मा को बर्खास्त करने की मांग की। विधानसभा बजट सत्र के शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि राजधानी से मात्र 50 किलोमीटर दूर विनायक ताम्रकार अपनी निजी भूमि पर अफीम की खेती कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे छत्तीसगढ़ को नशे से बर्बाद करने की यह कोशिश सामूहिक संरक्षण में की जा रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एफआईआर में मुख्य आरोपी का नाम पीछे रखा गया, जिससे लीपापोती का आरोप लगता है। उन्होंने बताया कि यह घटना होली से ठीक पहले सामने आई और यह स्पष्ट करती है कि सिर्फ नशे का व्यापार नहीं, बल्कि खेती भी अब हो रही है।

मामले की जांच एनडीपीएस एक्ट के तहत पुलिस कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, और यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने दी जानकारी
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में वर्ष 2025-26 के लिए धान खरीदी के बाद धान उठाव की स्थिति सामने आई है. राज्य के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल की दी गई जानकारी के अनुसार 19 फरवरी 2026 तक बस्तर संभाग के जिलों में कस्टम मिलर्स और परिवहनकर्ताओं ने धान का उठाव किया है. जारी आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिले में कस्टम मिलर्स ने 14,474.49 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं ने 32,372.37 मीट्रिक टन धान उठाया किया. इससे कुल उठाव 46,846.86 मीट्रिक टन रहा.

बीजापुर जिले में कुल 21,888.59 मीट्रिक टन धान का उठाव हुआ, जिसमें कस्टम मिलर्स ने 14,165.95 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं ने 7,722.64 मीट्रिक टन धान उठाया.

दंतेवाड़ा जिले में कुल 9,757 मीट्रिक टन धान का उठाव दर्ज किया गया। वहीं कांकेर जिले में सबसे अधिक धान उठाव हुआ है। यहां कस्टम मिलरों द्वारा 79,228.06 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं द्वारा 68,300.26 मीट्रिक टन धान उठाया गया, जिससे कुल उठाव 1,47,528.30 मीट्रिक टन रहा।

कोंडागांव जिले में कुल 58,911.78 मीट्रिक टन धान उठाव हुआ, जिसमें कस्टम मिलरों का 12,859.74 मीट्रिक टन और परिवहनकर्ताओं का 46,052.04 मीट्रिक टन योगदान रहा.

नारायणपुर जिले में कुल 17,383.06 मीट्रिक टन धान उठाया गया, जबकि सुकमा जिले में कुल 16,608.14 मीट्रिक टन धान का उठाव दर्ज किया गया. खाद्य मंत्री ने बताया कि बस्तर संभाग के जिलों में धान उठाव की प्रक्रिया लगातार जारी है और आवश्यकतानुसार परिवहन एवं मिलिंग की व्यवस्था की जा रही है.

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि 44,612 किसान धान खरीदी केंद्रों में धान बेचने ही नहीं आए.उन्होंने दावा किया कि जो किसान धान लेकर खरीदी केंद्रों तक पहुंचे, उनका धान खरीदा गया है.हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और सरकार पर धान खरीदी व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाया.

भूपेश बघेल ने उठाया जबरिया रकबा समर्पण का सवालपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार को घेरते हुए पूछा कि कितने किसानों से रकबा समर्पण कराया गया है और उनमें से कितने किसानों से जबरन रकबा समर्पण कराया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी के नाम पर किसानों के साथ अन्याय हो रहा है और सरकार इस पर स्पष्ट जानकारी देने से बच रही है.कवासी लखमा का सवाल—धान खरीदेंगे या कर्ज माफ करेंगे?विधायक कवासी लखमा ने कहा कि कई किसानों को टोकन जारी होने के बावजूद धान बेचने का मौका नहीं मिला. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया और जिन पर कर्ज भी है, उनके साथ सरकार क्या करेगी.उन्होंने सरकार से पूछा कि किसानों का धान खरीदा जाएगा या फिर उनका कर्ज माफ किया जाएगा.

तीखी बहस के बाद विपक्ष का वॉकआउट
धान खरीदी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई. मंत्री के जवाब को विपक्ष ने रटारटाया बताते हुए इसे किसानों के साथ अन्याय करार दिया. अंततः सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे धान खरीदी का मुद्दा विधानसभा में पूरी तरह से गरमा गया.

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