असरानी की आखिरी ख्वाहिश…’अंग्रेजों के जमाने के जेलर’ का क्यों हुआ चुपचाप अंतिम संस्कार?
मुंबई। हिन्दी सिनेमा के मशहूर अभिनेता और निर्देशक गोवर्धन असरानी का आज दोपहर मुंबई के जुहू स्थित आरोग्य निधि अस्पताल में निधन हो गया. वो 84 वर्ष के थे. असरानी का अंतिम संस्कार शाम को सांताक्रुज़ स्थित शास्त्री नगर श्मशान भूमि में परिवार और करीबी लोगों की मौजूदगी में शांतिपूर्वक किया गया. उनके मैनेजर बाबुभाई थीबा ने जानकारी दी कि असरानी का स्वास्थ्य पिछले कुछ समय से ठीक नहीं था और आज उन्होंने अंतिम सांस ली.
असरानी पिछले कुछ वक्त से फेफड़ों से संबंधित बीमारियों से ग्रसित थे और उनका इलाज भी हो रहा था. पिछले पांच दिनों से वो आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती थे, जहां डॉक्टर उनकी जान बचाने की हर कोशिश कर रहे थे, हालांकि अंत में उन्होंने दम तोड़ दिया.
असरानी की आखिरी ख्वाहिश
जानकारी के अनुसार, असरानी नहीं चाहते थे कि उनके निधन के बाद कोई शोर या हलचल मचे. उन्होंने अपनी पत्नी मंजू असरानी से पहले ही कह दिया था कि उनकी मृत्यु की खबर किसी को न दी जाए. इसी कारण परिवार ने बिना किसी औपचारिक घोषणा के चुपचाप उनका अंतिम संस्कार कर दिया.
हर पीढी का जीता दिल
गोवर्धन असरानी ने अपने लंबे करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और अपनी कॉमिक टाइमिंग तथा अनोखे अंदाज़ से दर्शकों के दिलों में जगह बनाई. शोले में जेलर के किरदार से लेकर चुपके चुपके, आ अब लौट चलें और हेरा फेरी जैसी फिल्मों तक, असरानी ने हर पीढ़ी को अपनी कला से प्रभावित किया.
असरानी का करियर
फिल्म हरे कांच की चूड़ियां से बॉलीवुड में कदम रखने वाले असरानी ने अपने करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उनकी यादगार फिल्मों में अनहोनी, आज की ताजा खबर, शोले, रफू चक्कर, अमर अकबर एंथनी, छोटी सी बात और भूल भुलैया जैसी फिल्में शामिल हैं.
हिन्दी सिनेमा ने आज अपने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है, जिसने हंसी और अभिनय, दोनों से दर्शकों का दिल जीता.
