January 9, 2026

DEO पर गिरेगी ‘कुत्ता कांड’ की गाज! : एक्शन में DPI, प्रश्न पत्र में कुत्तों के विकल्प में राम का नाम, डीईओ को नोटिस जारी कर जवाब तलब

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में चौथी कक्षा की अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान सामने आए तथाकथित “कुत्ता कांड” ने शिक्षा विभाग को कटघरे में ला खड़ा किया है। इस प्रकरण में अब जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) पर कार्रवाई की आंच पहुंचती नजर आ रही है। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने महासमुंद के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी कर तत्काल जवाब मांगा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो डीईओ के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

दरअसल, 8 जनवरी 2026 को महासमुंद जिले में कक्षा चौथी की अंग्रेजी विषय की अर्धवार्षिक परीक्षा में एक प्रश्न पूछा गया था—“मोना के कुत्ते का नाम क्या है?” इस प्रश्न के विकल्पों में ‘शेरू’ के साथ-साथ ‘राम’ नाम भी शामिल किया गया था। प्रश्नपत्र सामने आते ही धार्मिक संगठनों और आम नागरिकों में नाराजगी फैल गई और इसे हिंदू धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया।

डीपीआई द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिले के अंतर्गत संचालित प्राथमिक शालाओं की अर्धवार्षिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों का निर्धारण, मुद्रण और वितरण की संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी की होती है। इसके बावजूद प्रश्नपत्र तैयार करने में गंभीर लापरवाही बरती गई। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रश्न में कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में हिंदू धर्म के आराध्य देव भगवान राम का नाम शामिल किया जाना अत्यंत आपत्तिजनक, निंदनीय और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला है। इससे न केवल शासन बल्कि शिक्षा विभाग की छवि भी धूमिल हुई है।

डीपीआई ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि डीईओ का यह कृत्य पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है। यह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर पूछा गया है कि क्यों न उनके विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1968 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

नोटिस में डीईओ को निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल अपना लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो उनके विरुद्ध एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।

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