January 29, 2026

रूसी सुखोई फाइटर जेट के टायर पर दौड़ेगा भगवान जगन्नाथ का रथ, जानिए कौन सी कंपनी बना रही इसे

rathyatra

नई दिल्ली। इस्कॉन रथ यात्रा में इस साल भगवान जगन्नाथ का रथ नई तकनीक से लैस होगा। रथ में रूसी सुखोई फाइटर जेट के टायर लगाए गए हैं। ये वही टायर हैं, जो 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से रनवे पर दौड़कर उड़ान भरता है। बताया जा रहा है कि भगवान जगन्नाथ के रथ में पिछले साल स्टीयरिंग में आई खराबी के बाद ये बदलाव किया गया है। करीब 2 दशकों तक चली खोज के बाद नए टायर मिल पाए हैं।

इससे पहले भी भगवान जगन्नाथ के रथ में विमान के ही टायर इस्तेमाल किए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि पुराने टायर बोइंग B-747 विमान के थे, जिन्हें 5 दशक तक इस्तेमाल किया गया। अब इस विमान का इस्तेमाल नहीं किया जाता, इसलिए इसके टायर मिलने भी मुश्किल हो गए हैं। जब नए टायर की तलाश की जा रही थी तो सुखोई के 4 फीट के टायर, बोइंग के टायरों से मिलते-जुलते पाए गए। इनका व्यास भी 4 फीट था और वजन 110 किलो था।

रथों का निरीक्षण करने कोलकाता आए थे अफसर
पहले B-747 के टायर Dunlop कंपनी बनाती थी। अब MRF भारत में सुखोई Su-30MKI फाइटर जेट के लिए टायर बनाती है। इस्कॉन कोलकाता के उपाध्यक्ष राधारमण दास ने बताया कि जब उन्होंने MRF से रथ के लिए सुखोई के टायर मांगे तो पहले उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। इसके बाद MRF के बड़े अधिकारी रथों का निरीक्षण करने कोलकाता आए। उन्होंने देखा कि रथ 48 सालों से बोइंग 747 के टायरों पर चल रहे हैं। हमने उन्हें बताया कि सुखोई के टायर आकार और मजबूती में सबसे सही हैं, तब वे हमें टायर बेचने के लिए राजी हो गए।

रथ का पारंपरिक पूरी तरह सुरक्षित
राधारमण दास ने बताया कि कुछ मामूली बदलाव करने पड़े, जैसे कि पहिया ड्रम, बेस फ्रेम और एक्सेल फिटिंग में सुखोई के टायर लगाने के लिए। लेकिन रथ का पारंपरिक लकड़ी और लोहे का ढांचा पूरी तरह से सुरक्षित है।

लोहे के पहियों पर चलते हैं 2 रथ
बता दें कि भगवान बलराम या बलदेव का रथ पहले से ही नए लोहे के पहियों पर चल रहा है। पुराने लोहे के पहिये, जो 46 सालों से सेवा दे रहे थे, उन्हें 2024 में बदल दिया गया। चार पहियों में से एक को 2023 में बदला गया था। बलराम के रथ का हर पहिया 6 फीट का है और उसका वजन 250 किलो है।

5 टन के रथ को खींचते हैं पहिये
चारों पहियों का वजन एक टन है, जो 1977 में बने 5 टन के रथ को खींचते हैं। सुभद्रा के रथ के पहिए भी स्टील के बने हैं और अच्छी हालत में हैं। उम्मीद है कि वे अभी कई सालों तक चलेंगे। जगन्नाथ के रथ में पिछले साल स्टीयरिंग से जुड़ी जो समस्याएं आई थीं, उन्हें ठीक कर लिया गया है।

गति-दिशा को नियंत्रित करना आसान
इस पूरे बदलाव का मकसद यही है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सुरक्षित और सुगम हो। भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो और रथ भी बिना किसी रुकावट के अपनी यात्रा पूरी करे। नए टायरों से रथ की गति और दिशा को नियंत्रित करना आसान होगा. साथ ही, रथ के रख-रखाव में भी मदद मिलेगी।

कम हो जाएगी तकनीकी खराबी की संभावना
सुखोई के नए टायर रथ को चलाने में आसान बनाएंगे। इससे रथ ज्यादा सुरक्षित और स्थिर रहेगा। खासकर कोलकाता की सड़कों पर, जहां कई जगह ट्राम की पटरियां हैं। इससे रथ खींचने वाले भक्तों पर भी कम जोर पड़ेगा और तकनीकी खराबी की संभावना भी कम हो जाएगी। टायर बदलने का काम अभी चल रहा है। उम्मीद है कि रथ यात्रा से ठीक पहले, जून के दूसरे हफ्ते तक ये काम पूरा हो जाएगा। सबसे बड़ी चुनौती ये है कि नए पहियों को पारंपरिक ढांचे में बिना बदलाव किए सुरक्षित रूप से लगाया जाए।

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