January 29, 2026

पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष डेथ केस: बिलासपुर के अपोलो हॉस्पिटल प्रबंधन पर भी एफआईआर, फर्जी डॉ. एन जॉन कैम ने की थी सर्जरी

apolo farzi

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाने वाला एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पं. राजेन्द्र शुक्ल की वर्ष 2006 में हुई मौत को लेकर अब बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में एक फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर और अपोलो अस्पताल प्रबंधन (CG Assembly Speaker Death Case) के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने डॉ. नरेंद्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेंद्र जॉन कैम के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 465, 466, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना और उपयोग करना), 304 (गैर इरादतन हत्या), और 34 (साझा आपराधिक इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है।

बेटे ने की फर्जी डॉक्‍टर, हॉस्पिटल की शिकायत
यह मामला तब सामने आया जब डॉ. प्रदीप शुक्ला, जो कि स्वर्गीय राजेन्द्र शुक्ल के पुत्र हैं, ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी डिग्री पर डॉक्टर ने इलाज (CG Assembly Speaker Death Case) किया, जिससे उनके पिता की जान चली गई। यह मामला तब खुला, जब मध्‍य प्रदेश के दमोह जिले में इस फर्जी डॉक्‍टर के इलाज और सर्जरी के कारण लोगों की जान चली गई। इसके बाद लोगों ने जमकर हंगामा किया।

जांच में डॉक्टर की असली पहचान अलग-अलग
जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आरोपी डॉक्टर (CG Assembly Speaker Death Case) के नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम तक अलग-अलग पाए गए, जिससे उसकी पहचान संदिग्ध साबित हुई। पुलिस ने बताया कि डॉक्टर की गिरफ्तारी पहले ही मध्यप्रदेश के दमोह से हो चुकी है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि अपोलो अस्पताल प्रबंधन ने बिना दस्तावेजों की पुष्टि के फर्जी डॉक्टर को नौकरी पर रख लिया, जिससे गंभीर लापरवाही हुई और इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई।

अपोलो अस्पताल की भूमिका की भी जांच
पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन (CG Assembly Speaker Death Case) को भी FIR में आरोपी बनाया है और अब प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू कर दी गई है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या अस्पताल ने नियुक्ति से पहले डॉक्टर की डिग्री और प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया था या नहीं।

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