CG : इंदिरा आवास योजना में 79 लाख का गबन; कियोस्क संचालक गिरफ्तार, गरीबों के खातों से पैसे ट्रांसफर, ACB-EOW की बड़ी कार्रवाई
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में इंदिरा आवास योजना के तहत गरीबों के लिए जारी राशि में बड़े गबन का मामला सामने आया है। एसीबी-ईओडब्ल्यू रायपुर की टीम ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कियोस्क संचालक गौरव शुक्ला को गिरफ्तार किया है।
आरोपी पर आरोप है कि उसने योजना के तहत आए लाखों रुपये का दुरुपयोग किया और उन्हें अपने निजी खातों में ट्रांसफर कर लिया। इस घटना ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
79 लाख रुपए का गबन, आरोपी गिरफ्तार
एसीबी-ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज मामले के अनुसार आरोपी ने करीब 79 लाख रुपये का गबन किया है। उसे 16 अप्रैल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां विशेष न्यायाधीश न्यायालय कोरबा ने उसे 21 अप्रैल 2026 तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई को प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम माना जा रहा है।
निष्क्रिय खातों का किया दुरुपयोग
जांच में सामने आया है कि आरोपी गौरव शुक्ला बैंक ऑफ इंडिया की कोरबा शाखा में कियोस्क संचालक के रूप में कार्यरत था। उसने वर्ष 2010-11 में हितग्राहियों के खातों में आई राशि को वर्ष 2017 में अपने खातों में ट्रांसफर कर लिया। इसके लिए उसने ग्रामीण क्षेत्रों के निष्क्रिय खातों को निशाना बनाया। आरोपी ने बैंक कर्मचारियों की स्टाफ आईडी का गलत इस्तेमाल कर खातों को सक्रिय किया और लाभार्थियों के आधार नंबर हटाकर अपने और परिवार के आधार नंबर लिंक कर दिए।
तकनीकी खामियों का उठाया फायदा
आरोपी ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AEPS) के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कर रकम निकाल ली। जांच में यह भी सामने आया कि उसने बैंकिंग सॉफ्टवेयर ‘फिनेकल’ की तकनीकी कमजोरियों का फायदा उठाया। बिना आधार सत्यापन के ट्रांजेक्शन और ऑटो लॉगआउट सिस्टम की कमी का इस्तेमाल कर उसने लंबे समय तक इस गड़बड़ी को अंजाम दिया। आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों के आधार नंबर का भी इस्तेमाल किया, जिससे गबन की रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो गया।
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
एसीबी-ईओडब्ल्यू के अनुसार आरोपी ने 10 अलग-अलग स्टाफ आईडी के जरिए 620 से अधिक प्रविष्टियां कीं। इनमें कई एंट्री बिना किसी वैध दस्तावेज के की गईं। अब जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह मामला सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को फिर से उजागर करता है।
