CG में 210 नक्सलियों का ऐतिहासिक सरेंडर, ‘गनतंत्र’ छोड़ गणतंत्र में जताई आस्था, पुनर्वास से पुनर्जीवन का सपना साकार
जगदलपुर। नक्सलवाद पर करारी चोट का दिन है. इस दिन गनतंत्र को छोड़ गणतंत्र पर नक्सलियों ने भरोसा जताया और हिंसा को त्याग दिया. एक साथ 210 नक्सलियों ने सरेंडर कर देश के संविधान पर आस्था जताई है. बस्तर के पुलिस लाइन ग्राउंड में खून खराबे को छोड़ नक्सलियों ने समाज की मुख्य धारा की राह अपनाई है. सभी आत्मसर्मित नक्सलियों का फूलों के साथ स्वागत हुआ है. समाज के प्रबुद्ध वर्ग, पुलिस अधिकारियों ने संविधान की प्रति सौंप कर सरेंडर करने वाले नक्सलियों का स्वागत किया. सीएम साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा और डिप्टी सीएम अरुण साव ने भी सरेंडर करने वाले नक्सलियों का स्वागत किया.
जगदलपुर में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के सामने सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों का आदिवासी समुदाय के नेताओं और पुजारियों ने औपचारिक रूप से मुख्यधारा में स्वागत किया. इस अवसर पर उन्हें प्रेम, शांति और एक नई शुरुआत के प्रतीक के रुप में लाल गुलाब का फूल भेंट किया.
छत्तीसगढ़ के डीजीपी और बस्तर के आईजी सहित पुलिस अधिकारियों ने इसे अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नक्सल सरेंडर बताया. बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने मीडिया से बात करते हुआ कहा है कि जगदलपुर में शुक्रवार को नक्सलियों के एक केंद्रीय समिति सदस्य सहित 210 माओवादियों ने सरेडर किया है. यह नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में सबसे बड़ा सामूहिक आत्मसमर्पण है.
सरेंडर करने वाले वरिष्ठ माओवादी नेताओं में केंद्रीय समिति सदस्य रूपेश उर्फ सतीश, भास्कर उर्फ राजमन मंडावी, रनिता, राजू सलाम और धन्नू वेट्टी उर्फ संतू शामिल हैं. ये चारों दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति (डीकेएसजेडसी) के सदस्य हैं. इनके साथ क्षेत्रीय समिति सदस्य रतन एलम ने भी सरेंडर किया है- सुंदरराज पी, आईजी, बस्तर
बस्तर आईजी ने आगे बताया कि सरेंडर करने वाले माओवादियों ने 153 हथियार सौंपे है. जिनमें 19 एके-47 राइफलें, 17 सेल्फ-लोडिंग राइफलें, 23 इंसास राइफलें, एक इंसास एलएमजी (लाइट मशीन गन) हैं. इसके अलावा 36 थ्री नॉट थ्री राइफलें, चार कार्बाइन और 11 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल) भी नक्सलियों ने सौंपे हैं.
सीएम विष्णुदेव साय ने नक्सलियों के सरेंडर के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने इस घटनाक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल बस्तर बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए सबसे बड़ा ऐतिहासिक दिन है. आज भटके हुए 210 लोगों ने नक्सल विचारधारा और हिंसा को छोड़ देश की संविधान पर आस्था व्यक्त की है.
गुमराह और समाज से कटे हुए 210 भाई-बहन आज मुख्यधारा में वापस आ गए हैं. सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने संविधान, महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए अहिंसा के मार्ग और राज्य की पुनर्वास नीति में अपनी आस्था दिखाई है. आत्मसमर्पण करने वाले कार्यकर्ताओं में टॉप नक्सल लीडर से लेकर निचले स्तर के सदस्य शामिल हैं. इन सभी को बधाई देता हूं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं- विष्णुदेव साय, सीएम, छत्तीसगढ़
सीएम साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार मदद मुहैया कराएगी. इस नीति के तहत वित्तीय सहायता, भूमि लाभ, नई औद्योगिक नीति से जुड़े लाभ दिए जाएंगे. इसके अलावा उन्हें रोजगार से भी जोड़ा जाएगा.
