January 23, 2026

हथियार छोड़ दो पूर्व नक्सलियों ने थामा एक दूजे का हाथ, थाने में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुआ विवाह

KNKKKK

कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से एक बेहद सुंदर तस्वीर सामने आई है, जिसमें हथियार छोड़ चुके दो पूर्व नक्सली शादी के बंधन में बंधे नजर आए हैं. तस्वीर कांकेर जिले पखांजुर की है, जो किसी को भी आकर्षित कर सकती है. शादी के जोड़े में पूर्व नक्सलियों के चेहरों पर सजी मुस्कान उनके लिए प्रेरणा हैं, जो अभी भी भटके हुए हैं.

शादी के बाद एक दूजे के हुए दो पूर्व नक्सली उम्मीद ,बदलाव और विश्वास की कहानी बताते हैं. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ थाना परिसर में विवाह के बंधन में बंधे पूर्व नक्सली हाथों में सजी शादी की मेहंदी वाले हाथों से एक दूसरे को शादी का वरमाला पहनाकर भविष्य गढ़ने का संकल्प लिया.

पूर्व नक्सलियों ने घर बसाने और एक दूसरे के साथ रहने का वादा किया
गौरतलब है कभी हथियार थामकर जंगलों में घूमने वाले दोनों पूर्व नक्सली हाथों में मेहंदी लगाए एक दूसरे का साथ निभाने का वादा किया है. नक्सली संगठनों के बहकावे में कभी खून-खराबा करने वाले पूर्व नक्सली अब अपनी नई जिंदगी बसाने की ओर बढ़ चले हैं, जिसका उनका साथ छत्तीसगढ़ सरकार और उनकी पुनर्वास नीति ने दिया है.

वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ संपन्न हुआ पूर्व नक्सलियों का विवाह
रिपोर्ट के मुताबिक रविवार को जिले पखांजुर थाना क्षेत्र में मुख्यधारा में लौट चुके दोनों पूर्व नक्सलियों का विवाह संपन्न हुआ. शांति और प्रेम के रास्ते पर निकले दोनों पूर्व नक्सली क्रमशः सागर हिरदो और सचिला मांडवी ने अग्नि को साक्षी मानकर एक दूसरे के साथ निभाने का वादा किया है.

दोनों पूर्व नक्सली का विवाह पूरी सामाजिक और धर्मिक परम्पराओं के साथ संपन्न हुआ. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 7 फेरे लेकर दोनों ने शादी की पूरी रस्में निभाई. पखांजुर थाना प्रभारी लक्ष्मण केवट और गोण्डाहुर थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारियों शादी में अहम भूमिका निभाई.

साल 2024 में दोनों पूर्व नक्सलियों ने किया था आत्म-समर्पण
उल्लेखनीय है साल 2014 में नक्सल संगठन से जुड़े दूल्हा बने सागर हिरदो ने पखांजुर पुलिस के सामने दिसम्बर 2024 को आत्मसमर्पण कर किया, जबकि दुल्हन बनीं सचिला मांडवी साल 2020 में नक्सल संगठन से जुड़ी और 2024 को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था.

सरेंडर के बाद पुलिस बल का हिस्सा बने दोनों पूर्व नक्सली
नक्सली संगठन का साथ छोड़कर आत्म-समर्पण करने वाले दोनों बाद में पुलिस बल का हिस्सा बन गए और इसी दौरान दोनों की पहचान हुई और दोनों विवाह करने का फैसला कर लिया. दो पूर्व नक्सलियों का विवाह संदेश देता है कि शांति, विश्वास, पुनर्वास, प्रेम, सम्मान, परिवर्तन और नई शुरुआत के लिए समाज आगे खड़ा है.

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