June 14, 2024

छग: बेमौसम बरसात से भीगा लाखों क्विंटल धान, रबी फसलों को भी नुकसान

रायपुर/कोरबा/बेमेतरा ।  छत्तीसगढ़ में मंगलवार की दोपहर  रुकरुक कर हो रही बरसात से धान संग्रहण केंद्रों में रखा धान भींग गया हैं। एक ओर जहां सब्जी और रबी की फसल बारिश की भेंट चढ़ गई है, वहीं धीमे परिवहन के कारण धान उपार्जन केंद्रों में डंप पड़ा हजारों क्विंटल धान भीग गया है. कोरबा,मुंगेली और बेमेतरा सहित कई जिलों में अचानक हुई बारिश के बाद खुले में रखा धान भीग गया है. कोरबा के जिला खाद्य एवं विपणन विभाग ने धान खरीदी समापन के बाद दावा किया था कि 15 दिन के भीतर धान उठाव कर लिया जाएगा, लेकिन तय समय पर ये पूरा नहीं किया गया. जिसके कारण अब अचानक हुई बारिश से धान भीग गए हैं. बारिश से 1.70 लाख क्विंटल धान भीगने का अनुमान लगाया जा रहा है.

इस साल समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के अंतिम दिन तक जिले में 13.52 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई है. बेहतर बारिश और बढ़िया उत्पादन से किसानों ने अनुमान लगाया था कि उन्हें इस वर्ष भी अच्छी कीमत मिलेगी, लेकिन रकबा कटौती से किसान पूरा धान बेचने में असफल रहे. सरकार ने 2500 रुपए में खरीदी का आश्वासन दिया था, वह भी पूरा नहीं किया गया. राजीव गांधी न्याय योजना के तहत खरीदी की राशि के चौथे किश्त का भुगतान अब भी बाकी है.


बीते वर्ष तक जीरो शॉर्टेज में पूर्ण धान उठाव हो रहा था, लेकिन इस बार लंबित उठाव को देखते हुए खरीदे गए धान में कमी आने की संभावना है. धान की सुरक्षा के लिए प्रति क्विंटल तीन रुपए की दर निर्धारित है. सुरक्षा राशि से प्रभारियों ने बिजली तार और फ्लैक्स की खरीदी के साथ ही हमाल का भुगतान भी किया है.

धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन और रकबे की बढ़त हुई. खरीदी अधिक होने की जानकारी के बाद भी पर्याप्त कैप कव्हर की खरीदी नहीं की गई. पहले 42 उपार्जन केंद्र संख्या के अनुसार 430 तिरपाल की खरीदी की गई थी, जो कि अब बढ़कर 49 हो चुके हैं. खरीदी के बाद सात नए केंद्र में भी धान खरीदी की घोषणा कर दी गई. जिससे केंद्रों को पर्याप्त तिरपाल नहीं मिला. अतिरिक्त मांग किए जाने पर पुराने से ही काम चलाने के लिए कहा गया. खरीदी शुरू होने के तीन सप्ताह बाद दिसंबर में बारिश हुई थी, तब भी काफी मात्रा में धान भीग गए थे.

उठाव के अभाव में अधिक दिन तक खुले आसमान के नीचे रखे होने के कारण धान पर मौसमी मार पड़ रही है. मिलिंग के दौरान चावल टूटेगी. बारिश से प्रभावित बताकर मिलर्स बेहतर धान की मिलिंग से निकले चावल को लेकर कनकी मिश्रित चावल जमा कर देते हैं. जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है. धान बिक्री के लिए लाने वाले किसानों पर उसकी सुरक्षा के लिए कई तरह की शर्तें लगाई जाती है. जब यही धान सरकारी हो जाती है, तब उसे असुरक्षित छोड़ दिया जाता है.

बेमेतरा जिले की सेवा सहकारी समितियों में अब भी हजारों क्विंटल धान पड़ा हुआ है, जिसका परिवहन नहीं हो पाया है. जिले के दर्जनों सेवा सहकारी समितियों में अब भी 20 हजार क्विंटल से ज्यादा का धान स्टॉक में है. जिले में धीमे परिवहन के कारण अब धान बेमौसम बारिश की भेंट चढ़ रहा है. जिम्मेदार अब भी पर्याप्त कैप कवर होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं. अब ये तो धान का पूरा उठाव हो जाने के बाद ही पता चलेगा कि आखिर बारिश से धान को कितना नुकसान हुआ है.

बेमेतरा जिले में चने की फसल बर्बाद होने से किसान परेशान हैं. करीब 30 फीसदी चने की फसल उखटा रोग की भेंट चढ़ चुकी है. वहीं बची हुई फसल पर भी बेमौसम बारिश की मार पड़ी है. मसूर, टमाटर और अन्य सब्जियों को भी नुकसान पहुंचना तय माना जा रहा है. किसानों की मानें तो बारिश से धान और गेहूं की फसल को फायदा होगा.

error: Content is protected !!