January 23, 2026

CG : उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व, आराम फर्माते उड़न गिलहरी और औटर कैमरे में हुए कैद…

udanti

धमतरी। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व हमेशा से जीव जंतुओं के लिए बेहतरीन पनाहगार रहा है. अक्सर यहां से वन्य जीवों की सुंदर तस्वीरें सामने आते रहती हैं. एक बार फिर वन विभाग के कैमरे ने यहां की दुर्लभ तस्वीरें कैद की हैं. वन विभाग ने अपने कैमरे में इस बार मालाबार पाइड हार्नबिल और पेरेग्रीन फाल्कन जो दुनिया का सबसे तेज़ उड़ने वाला पक्षी है उसे उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में देखा है. इसके साथ ही यहां पर उड़न गिलहरी, इन्द्रधनुषी गिलहरी और औटर भी वन विभाग को अठखेलियां करते नजर आए हैं.

उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व से आई खूबसूरत तस्वीरें: वन विभाग ने इनकी तस्वीरें भी साझा करते हुए कहा कि बड़ी खुशी की बात है कि हमारे उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में इस तरह के पक्षी पहुंच रहे हैं. उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के कैमरे में कैद हुए सभी पक्षी और स्तनपायी जीव ज्यादातर केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में स्थित पश्चिमी घाट (एवरग्रीन फारेस्ट) के जंगलों में पाए जाते हैं. उदंती एवं सीतानदी अभ्यारण्य में पश्चिमी घाट जैसा रहवास होने के कारण बड़ी संख्या में पक्षी और जीव यहां पहुंचते हैं. सर्दियों के शुरु होने से पहले का मौसम इनके लिए यहां अनुकूल होता है.

टाइगर रिज़र्व प्रबंधन द्वारा राष्ट्रिय वन्यजीव सप्ताह 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर के दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रो से आये पर्यटकों एवं विद्यार्थियों को बर्ड वाचिंग, ट्रैकिंग, जिप्सी सफारी के माध्यम से वनों एवं वन्यप्राणी संरक्षण के बारे में बताया जाएगा. मालाबार पाइड हार्नबिल एवं पेरेग्रिन फाल्कन को देखने के लिए 2500 फीट ऊंची ओढ़ एवं आममोरा की पहाडियों पर ट्रैकिंग एवं बर्ड वाचिंग सेशन करवाए जाएंगे. स्थानीय गाइड्स द्वारा पर्यटकों को हार्नबिल संरक्षण एवं संवर्धन के बारे में बताया जाएगा: वरुण जैन, उदंती सीतानदी के उप निदेशक

उड़न गिलहरी और इन्द्रधनुषी गिलहरी देखना हो तो यहां आएं: टाइगर रिज़र्व प्रबंधन की ओर से बताया गया कि इसी प्रकार उड़न गिलहरी एवं इन्द्रधनुषी गिलहरी देखने के लिए कोयबा इको सेंटर एवं सांकरा (नगरी) इको सेंटर में कार्यक्रम रखे जाएंगे. वन विभाग ने बताया कि सीतानदी क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुर्लभ पशु पक्षी मिलते हैं जिनके संरक्षण और संवर्धन दोनों का काम भी किया जा रहा है. टाइगर रिज़र्व प्रबंधन की ओर से पर्यटकों के लिए रात्रि में इको सेंटर कोयबा एवं ओढ़ में टेलिस्कोप एवं कैमरों के माध्यम से स्टार गेजिंग सेशन रखे जा रहे हैं. रिजर्व में स्कूली बच्चों के लिए क्विज एवं पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जा रहा है.

उड़ने वाली गिलहरी को ग्लाइडिंग गिलहरी भी कहते हैं: नेशनल वाइल्ड लाइफ फेडरेशन के मुताबिक उड़ने वाली गिलहरियों को “ग्लाइडिंग गिलहरी” भी कहा जा सकता है. ये पक्षी या चमगादड़ जैसी शक्तिशाली उड़ान नहीं भर पातीं हैं लेकिन लंबी उड़ने से जैसी छलांग जरुर लगाती हैं. इनके आगे और पीछे के पैरों के बीच एक विशेष झिल्ली होती है जो उन्हें पेड़ों के बीच हवा में ग्लाइड करने में मदद करती है. जब एक उड़ने वाली गिलहरी ज़मीन को छुए बिना दूसरे पेड़ पर जाना चाहती है, तो वह किसी ऊंची डाल से कूद जाती है और अपने अंगों को फैला देती है ताकि ग्लाइडिंग झिल्ली दिखाई दे. यह दिशा बदलने के लिए पैरों की हल्की-सी हरकत का इस्तेमाल करती हैं, और अपनी मंज़िल पर पहुंचने पर पूंछ से ब्रेक लेने का काम करती हैं. उड़ने वाली गिलहरियां एक बार में 150 फ़ीट से ज़्यादा की दूरी तय कर सकती हैं.

मालाबार पाइड हॉर्नबिल कहा पाए जाते हैं: मालाबार पाइड-हॉर्नबिल एक मध्यम आकार का वन हॉर्नबिल है जिसके आकर्षक काले और सफेद पंख और एक प्रमुख कास्क होता है. यह प्रजाति दक्षिण एशिया के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में पाई जाती हैं जैसे श्रीलंका, पश्चिमी घाट, और मध्य भारत के कुछ हिस्से और पूर्वी घाट में.

मुख्य खबरे

error: Content is protected !!