छत्तीसगढ़ में पहली बार दिखा विदेशी पक्षी ‘मलार्ड’, संरक्षण के लिए 12 वॉलिंटियर्स तैनात…
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले का प्रसिद्ध गिधवा-परसदा पक्षी विहार एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह बनी है एक विदेशी मेहमान मलार्ड पक्षी के कारण। यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ की धरती पर इस प्रजाति को देखा गया है। गिधवा-परसदा के शांत और हरियाली से घिरे जलाशय में इसकी मौजूदगी ने इसे अंतरराष्ट्रीय पक्षी प्रवास स्थल के रूप में नई पहचान दिला दी है। वन मंडल अधिकारी दुर्ग दीपेश कपिल ने बताया कि पक्षियों की देखरेख और संरक्षण के लिए ग्राम गिधवा परसदा में 12 वॉलिंटियर्स तैनात किए गए हैं।

अक्टूबर से पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है जो की फरवरी मार्च तक रहते हैं। मलार्ड, जिसे वैज्ञानिक नाम अनास प्लैटिरिनचोस से जाना जाता है, जो बतख प्रजाति का पक्षी है। यह सामान्यतः यूरोप, उत्तरी अमेरिका, एशिया और उत्तरी अफ्रीका जैसे ठंडे इलाकों में पाया जाता है। उन्होंने बताया कि पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार बेमेतरा में इसका आगमन इस बात का संकेत है कि अब छत्तीसगढ़ की जलवायु और पारिस्थितिकी प्रणाली अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के लिए अधिक अनुकूल होती जा रही है। गिधवा-परसदा तालाब और आसपास की आर्द्रभूमि लगभग 180 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। हर साल सर्दियों के मौसम में यहां देश-विदेश से सैकड़ों पक्षी प्रजातियां डेरा डालती हैं। अब तक यहां ग्रे हेरॉन, ब्लैक-हेडेड आईबिस, ओपन बिल स्टॉर्क, कॉमन टील, पिंटेल डक, रेडक्रेस्ट पोचार्ड जैसी प्रवासी प्रजातियां देखी जाती थीं, लेकिन इस वर्ष मलार्ड के आगमन ने इस स्थल का महत्व और बढ़ा दिया है।
स्थानीय पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों ने मलार्ड को अपने कैमरे में कैद किया, जिसके बाद वन विभाग और पक्षी विशेषज्ञों ने इसकी पुष्टि की। दीपेश कपिल ने बताया कि यह छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ा पारिस्थितिक संकेत है, क्योंकि यह दर्शाता है कि राज्य की जल-भूमि अब अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के लिए उपयुक्त बन चुकी है। गिधवा-परसदा में हर वर्ष प्रवासी पक्षियां पहुंचती है। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही तालाबों के किनारे पक्षियों की चहचहाहट और रंग-बिरंगे पंखों का दृश्य इसे आकर्षक बना देता है।
