Navodaya Class 6 Admission 2026-27: नवोदय स्कूल क्लास 6th प्रवेश में EWS को जगह नहीं, देशभर में हजारों छात्र वंचित-हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
जबलपुर। जवाहर नवोदय विद्यालयों की क्लास 6th 2026 -27 की प्रवेश प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के छात्रों को कोई अवसर न दिए जाने के मामले ने अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मुद्दे पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने गंभीरता दिखाते हुए केंद्र सरकार, केन्द्रीय नवोदय विद्यालय (Navodaya Vidyalaya Samiti) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता के अधीवक्ता विकास मिश्रा ने बताया यह याचिका एक नाबालिग छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी द्वारा दायर की गई है याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, ऐसे में EWS वर्ग को बाहर रखना नीति के उद्देश्य के विपरीत है।
याचिका में बताया गया है कि जवाहर नवोदय विद्यालयों (Jawahar Navodaya Vidhyala) में प्रवेश के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं और दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू है लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए कोई भी आरक्षण या विशेष प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे इस वर्ग के छात्र पूरी तरह से बाहर हो जाते हैं।
देश भर में 650 नवोदय विद्यालय
देश में वर्तमान में लगभग 650 से अधिक नवोदय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें करीब 2.9 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। इनमें SC, ST और OBC वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि EWS वर्ग के लिए कोई अलग स्थान या आरक्षण नहीं है।
क्या है याचिका में
याचिका में उल्लेख किया गया है, कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा संस्थानों में 10% तक आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है।इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में EWS को शामिल नहीं किया गया, जिसे याचिका में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है।
मामले में यह भी उठाया गया है कि केन्द्रीय नवोदय विद्यालय (Kendriya Vidyalaya Sangathan) के अंतर्गत संचालित केंद्रीय विद्यालयों में EWS वर्ग के छात्रों को प्रवेश में अवसर मिलता है, जबकि उसी मंत्रालय के अधीन संचालित नवोदय विद्यालयों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। यह स्थिति एक ही मंत्रालय के दो संस्थानों में अलग-अलग नियम लागू होने की ओर इशारा करती है, जिसे याचिका में भेदभावपूर्ण और असंगत बताया गया है।
याचिका में कहा गया है कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को पूरी तरह से बाहर रखना नीति की मूल भावना के विपरीत है।
EWS छात्रों को अवसर न मिलना गंभीर मुद्दा
याचिका में हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले Atharv Chaturvedi v. State of Madhya Pradesh & Others (10 फरवरी 2026) का हवाला दिया गया है, जिसमें न्यायालय ने EWS छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा मानते हुए राहत प्रदान की थी।सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सॉलिसिटर जनरल उपस्थित हुए। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
