छत्तीसगढ़ में SC-ST एक्ट के तहत 3 साल में 2455 केस दर्ज: 41% मामले रेप से जुड़े, जांजगीर-चांपा और बलरामपुर में सबसे ज्यादा अपराध
रायपुर। छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े अपराधों के मामलों को लेकर सरकार ने विधानसभा में महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 के बीच अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कुल 2455 मामले दर्ज किए गए हैं। यह जानकारी विधानसभा में लिखित प्रश्नोत्तर के दौरान सामने आई। इस दौरान सरकार ने बताया कि इन मामलों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है।
सबसे ज्यादा मामले रेप के
सरकारी आंकड़ों के अनुसार दर्ज मामलों में सबसे अधिक संख्या रेप के मामलों की है। कुल 2455 मामलों में से 1013 मामले बलात्कार से जुड़े हैं, जो लगभग 41 प्रतिशत है। इसके अलावा 73 हत्या (मर्डर) के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं मारपीट कर चोट पहुंचाने के 380 मामले और गंभीर चोट पहुंचाने के 60 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 30 मामलों में अपहरण की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं।
विधानसभा में उठाया गया सवाल
यह पूरा मामला विधानसभा में उस समय सामने आया जब भाजपा विधायक पुन्नूलाल मोहले ने सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने पिछले तीन सालों के दौरान SC-ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या और अपराधों की प्रकृति की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने सदन में विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए।
इन जिलों में सबसे ज्यादा केस
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो कुछ जिलों में मामलों की संख्या काफी अधिक है। सरकार के अनुसार जांजगीर-चांपा जिले में सबसे ज्यादा 168 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके बाद बलरामपुर जिले में 165 मामले दर्ज हुए हैं। राज्य के कुल 33 जिलों में से 8 जिलों में 100 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं।
अधिकांश मामलों में चालान पेश
सरकार ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश कर दिया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार 2269 मामलों में पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिया है। वहीं 166 मामलों की जांच अभी भी जारी है। इसके अलावा 20 मामलों में केस खारिज कर दिए गए या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है।
पीड़ितों को आर्थिक सहायता
सरकार ने बताया कि SC-ST एक्ट के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान है। अपराध की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग राशि तय की जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 16 फरवरी 2026 तक 1647 मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है।
28 करोड़ से ज्यादा की मदद
सरकार के मुताबिक अब तक पीड़ितों को 28 करोड़ रुपये से अधिक की राशि आर्थिक सहायता के रूप में दी जा चुकी है। कई मामलों में यह राशि अलग-अलग चरणों में जारी की जाती है। हालांकि अभी भी 670 मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इन मामलों के प्रस्ताव आदिम जाति विकास समिति की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं।
विधानसभा के प्रश्नकाल में सामने आए आंकड़े
SC-ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों से जुड़ा यह पूरा डेटा विधानसभा के प्रश्नकाल में सामने आया। भाजपा विधायक पुन्नूलाल मोहले द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लिखित रूप से यह आंकड़े सदन में पेश किए। सरकार का कहना है कि ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार काम कर रहे हैं।
