मिशन उत्कर्ष : अर्द्धवार्षिक में 10वीं-12वीं के रिजल्ट को लेकर संदेह!, कई स्कूलों ने फेल बच्चों को बता दिया है पास, बेहतरी के लिए स्पेशल प्रश्न बैंक हो रहा तैयार, एक्स्ट्रा क्लास भी होगी
रायपुर। राजधानी सहित जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के अर्द्धवार्षिक परीक्षा परिणाम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि दसवीं में तो जीवविज्ञान ,गणित और अंग्रेजी में बच्चों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक हैं। बारहवीं के परिणाम थोड़े अच्छे हैं पर उत्साहवर्धक वह भी नहीं कहे जा सकते हैं। हालांकि शिक्षा विभाग कागज़ी आंकड़ों में परिणाम को ठीकठाक बता रहा हैं। विभाग की मानें तो 10वीं में सिर्फ 22% स्टूडेंट ही फेल हुए हैं, वहीं 12वीं में 33% स्टूडेंट फेल रहे। दावा किया जा रहा हैं कि दोनों कक्षाओं में 3-3 स्कूल ऐसे रहे, जहां 100% रिजल्ट रहा है। वहीँ ज़मीनी हकीकत इससे परे हैं। कई स्कूलों में तो हिंदी जैसे विषयों में भी आधे से ज्यादा बच्चे फेल हैं।

बता दे शिक्षा सत्र के शुरू में ही कलेक्टर ने मिशन उत्कर्ष के तहत स्कूल शिक्षा खासकर दसवीं और बारहवीं कक्षाओं में अच्छे परिणाम लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से टारगेट तय किया था। लेकिन मासिक आंकलन और तिमाही तथा छमाही परीक्षाओं के परिणामों ने पोल खोल कर रख दी हैं। अधिकॉंश स्कूलों के वास्तविक परिणाम शिक्षा के स्तर को चीख चीख कर बता रहे हैं। कागज़ी आंकड़ों में जरूर ग्रेडिंग पद्धति से ज्यादा से ज्यादा बच्चों को उत्तीर्ण घोषित कराया गया हैं। लेकिन कई स्कूलों में वही बच्चे आंसरशीट में ज्यादा कुछ नहीं लिख पाने के चलते फेल हैं। लेकिन परिणाम बढ़ाने के चक्कर में उन्हें ही पास बता दिया गया हैं। इतना ही नहीं इस बार मूल्याङ्कन भी दूसरे स्कूलों में होने की वजह से परिणाम पर असर पड़ा हैं। बताया जा रहा हैं कि कतिपय कारणों से जीवविज्ञान और संस्कृत के प्रश्नपत्र भी परीक्षा के दिन ही बदले गए थे। सूत्र बता रहे हैं कुछ स्कूलों में तो दो दिन पूर्व ही जीवविज्ञान और संस्कृत के प्रश्न बच्चों को लिखा दिए गए थे। प्रश्नपत्र बदलने से ऐसे जगहों में विवाद की स्थिति निर्मित हो गई थी।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक़ परिणाम बेहतर करने के लिए DEO ऑफिस ने नया प्रयोग शुरू किया है। इसके तहत केवल रायपुर जिला के स्कूलों के लिए विषयवार प्रश्न बैंक तैयार किए गए हैं, जिन्हें जल्द ही विद्यालयों में वितरित किया जाएगा। प्रश्न बैंक के जरिए टीचर्स, स्टूडेंट्स को बेहतर तैयारी करा पाएंगे। बताया जा रहा हैं कि समीक्षा के बाद अलग-अलग स्कूलों के लिए अलग-अलग दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

जिन स्कूलों के नतीजे कमजोर रहे, वहां खास रणनीति लागू होगी।
अनुत्तीर्ण छात्रों को उत्तीर्ण कराने पर प्राथमिक फोकस रहेगा।
अच्छे अंक लाने वाले विद्यार्थियों को मेरिट सूची के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
एक्स्ट्रा क्लास भी ली जाएगी।
यह पहल शैक्षणिक सत्र 2025-26 की शुरुआत से चल रहे मिशन उत्कर्ष का हिस्सा है।
अति-लघु और लघु-उत्तरीय सवालों पर फोकस
अब तक के ऑब्जर्वेशन में ये सामने आया है कि स्टूडेंट नार्मली कम अंक वाले प्रश्नों के उत्तर ज्यादा शब्दों में लिख देते हैं। इसे सुधारने के लिए – ब्लूप्रिंट के आधार पर छात्रों को बताया जाएगा कि किस टॉपिक से कितने अंकों के प्रश्न आएंगे। अधिक अंक वाले प्रश्नों के उत्तर विस्तार से, कम अंक वाले प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखने का अभ्यास कराया जाएगा। कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को अति-लघु व लघु-उत्तरीय प्रश्नों की विशेष तैयारी कराई जाएगी, ताकि वो उसमें बेहतर नंबर ला पाएं।
10वीं बोर्ड के रिजल्ट पर नजर: साल 2024 की सीजीबीएसई बोर्ड परीक्षा में रायपुर का रिजल्ट कैसा रहा. इस बारे में शिक्षा विभाग से जानकारी मिली है. रायपुर का ओवरऑल रिजल्ट 71.64 प्रतिशत रहा. जबकि राज्य का औसत 76.53 प्रतिशत था. इस तरह जिले का प्रदर्शन राज्य से 4.89 प्रतिशत कम रहा. लेकिन 2025 में स्थिति और बिगड़ गई.जिले का परिणाम घटकर 67.24 प्रतिशत पर आ गया, जबकि राज्य का औसत 75.61 प्रतिशत रहा. यानी अंतर बढ़कर 8.37 प्रतिशत तक पहुंच गया.

12वीं बोर्ड का कैसा रहा परिणाम?: दूसरी ओर कक्षा 12वीं में 2024 में जिले का परिणाम 83.19 प्रतिशत था, जो राज्य के औसत 81.87 प्रतिशत से 1.32 प्रतिशत बेहतर था. लेकिन 2025 में यह घटकर 79.94 प्रतिशत रह गया, जबकि राज्य का औसत 80.74 प्रतिशत रहा. इस तरह जिले का प्रदर्शन राज्य से 0.80 प्रतिशत कम हो गया.

दसवीं बोर्ड परीक्षा 2025 में विषयवार रिजल्ट: विषयवार परिणामों पर नजर डालें तो 10वीं में संस्कृत विषय में विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां 92.98 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए. हिंदी में 85.27 प्रतिशत, विज्ञान में 76.15 प्रतिशत, सामाजिक विज्ञान में 72.90 प्रतिशत और अंग्रेज़ी में 71.17 प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए. लेकिन गणित सबसे कमजोर विषय साबित हुआ, जहां केवल 53.25 प्रतिशत विद्यार्थी ही उत्तीर्ण हो पाए.
तिल्दा ब्लॉक रहा टॉप परफॉर्मर : ब्लॉक स्तर पर तिल्दा का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां 76.60 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए, जबकि धरसीवां, अभनपुर और आरंग का प्रदर्शन भी लगभग समान रहा.
12 वीं बोर्ड परीक्षा का 2025 में विषयवार परिणाम: इसी तरह कक्षा 12वीं में फीजिक्स सबसे कठिन सबजेक्ट साबित हुआ. इसमें 25.30 प्रतिशत विद्यार्थी फेल हो गए. अर्थशास्त्र में 23.80 प्रतिशत, राजनीति विज्ञान में 17.30 प्रतिशत, भूगोल में 16.80 प्रतिशत और रसायन शास्त्र में 16.70 प्रतिशत विद्यार्थी फेल हुए. गणित में 14.20 प्रतिशत, अकाउंटेंसी में 13.80 प्रतिशत और व्यवसाय अध्ययन में 12 प्रतिशत विद्यार्थी फेल हुए. इतिहास में 10.10 प्रतिशत और जीव विज्ञान में केवल 8.80 प्रतिशत विद्यार्थी फेल हुए. जिससे जीव विज्ञान सबसे बेहतर परिणाम देने वाला विषय साबित हुआ.
मिशन उत्कर्ष का लक्ष्य: इस बार बोर्ड एग्जाम को लेकर मिशन उत्कर्ष की रणनीति बनाई गई है. इसके तहत 100 फीसदी सफलता हासिल करने का लक्ष्य तय किया गया है. इसके तहत 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर देने पर फोकस है.
