January 13, 2026

सरकार का बड़ा कदम, पेन किलर निमोस्लाइड की 100 एमजी से ज्यादा की गोलियों पर लगाया बैन

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने निमोस्लाइड दवा (पेन किलर) को लेकर बड़ा कदम उठाया है. इसको लेकर सरकार ने 100 एमजी (mg) से अधिक खुराक वाली निमोस्लाइड की ओरल दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से बैन लगा दिया है.

29 दिसंबर को स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस बैन की अधिसूचना जारी की. यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत लिया गया है. सरकार का कहना है कि ये दवा स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरी हो सकती है. इसके कई सुरक्षित विकल्प मार्केट में मौजूद हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया गया है कि 100 एमजी से अधिक वाली निमोस्लाइड दवा मनुष्यों के लिए खतरा पैदा कर सकती है. यह एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, इसका लीवर पर खराब प्रभाव हो सकता है. इसके अलावा इस दवा के अन्य प्रतिकूल प्रभावों की वजह से दुनिया भर में जांच की जा रही है.

वहीं सरकार ने ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सलाह के बाद निमोस्लाइड दवा पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही इस दवा पर अब पूरे देश में तुरंत प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है. स्वास्थ्य मंत्रालय मनुष्य पर पेन किलर दवा के खतरे के मद्देनजर लिया है. जिससे लोगों की हेल्थ को किसी तरह का जोखिम नहीं हो. गौरतलब है कि पेनकिलर की डोज लेने की वजह से लिवर और किडनी पर प्रभाव पड़ता है. वहीं डॉक्टर भी पेनकिलर दवा के कम इस्तेमाल पर जोर देते हैं.

पशुओं के इलाज में पहले से ही है प्रतिबंधित
सरकार ने पशुओं में उपयोग होने वाली सभी निमोस्लाइड दवाओं पर पहले ही बैन लगा दिया था. इसकी वजह पर्यावरण था, क्योंकि अध्ययन में पाया गया कि गिद्धों को यह दवा देने पर 24 घंटे में मौत हो जाती थी.

कई देशों में इसको नहीं मिली मंजूरी
बताया जाता है निमोस्लाइड दवा को 1985 में इटली में प्रस्तुत किया गया था और यह NSAID (नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग) श्रेणी की दवा है. दुनिया भर के कई देशों में अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया,यूके, जापान और न्यूजीलैंड में इसे मंजूरी नहीं मिली. वहीं लंबे समय तक इसके प्रयोग से लीवर टॉक्सिसिटी, ब्लीडिंग, किडनी डैमेज और त्वचा पर रैश जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

भारत में अब तक के हालात
भारत ने 2011 में बच्चों में निमोस्लाइड के प्रयोग पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन बड़े मरीजों को इसे खिलाया जा रहा था. हालांकि मार्च 2023 में भारतीय फार्माकोपिया कमीशन ने इसको लेकर चेतावनी दी थी कि यह दवा फिक्स्ड ड्रग एरप्शन (बार-बार एक ही जगह रैश) भी पैदा कर सकती है.

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