छत्तीसगढ़ में RTE प्रवेश नियम बदला, निजी स्कूलों में अब सिर्फ कक्षा 1 में मिलेगा एडमिशन, शासन का बड़ा फैसला
रायपुर। छत्तीसगढ़ में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के फैसले के अनुसार अब प्रदेश के निजी विद्यालयों में बच्चों का RTE के तहत प्रवेश (Chhattisgarh RTE News) केवल कक्षा पहली में ही किया जाएगा। यह नई व्यवस्था आगामी शिक्षा सत्र से लागू होगी।
नर्सरी और PP-1 में RTE प्रवेश व्यवस्था समाप्त
अब तक RTE के तहत (CG RTE Admission 2025) बच्चों को निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी-वन (PP-1) और कक्षा पहली तीनों स्तरों पर प्रवेश दिया जाता था। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने एंट्री क्लास (नर्सरी और केजी-वन) की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने RTE अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के तहत यह प्रस्ताव शासन को भेजा था, जिसे प्रशासकीय स्वीकृति मिल गई है।
पहले कक्षा पहली से ही होता था प्रवेश
जानकारी के अनुसार RTE लागू (Private School RTE Admission) होने के शुरुआती वर्षों में निजी स्कूलों में प्रवेश केवल कक्षा पहली में ही होता था। बाद में निजी स्कूलों की मांग और बच्चों की शैक्षणिक समस्याओं को देखते हुए राज्य शासन ने एंट्री क्लास में प्रवेश का प्रावधान जोड़ा था। अब शासन ने एक बार फिर नियम में बदलाव कर दिया है।
फीस प्रतिपूर्ति का पूरा खर्च वहन करता है शासन
RTE के तहत प्रवेशित बच्चों की फीस राज्य शासन द्वारा निजी स्कूलों को दी जाती है।
कक्षा 1 से 5 तक: ₹7,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष + ₹540 यूनिफॉर्म
कक्षा 6 से 8 तक: ₹11,500 प्रति छात्र प्रति वर्ष + ₹1,000 यूनिफॉर्म
कक्षा 9 से 12 तक: ₹15,000 प्रति छात्र प्रति वर्ष + ₹1,000 यूनिफॉर्म
गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2011 से अब तक RTE फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
निजी स्कूल एसोसिएशन ने फैसले का किया विरोध
छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि RTE में एंट्री क्लास में प्रवेश का स्पष्ट प्रावधान है। अधिकतर निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई नर्सरी या केजी-वन से शुरू होती है।
ड्रॉपआउट बढ़ने की जताई आशंका
एसोसिएशन का कहना है कि सीधे कक्षा पहली में प्रवेश देने से BPL वर्ग के बच्चों पर पढ़ाई का मानसिक दबाव बढ़ेगा। वे अन्य बच्चों से पिछड़ सकते हैं, जिससे ड्रॉपआउट की संभावना भी बढ़ेगी। उनका आरोप है कि शासन नर्सरी और केजी-वन की फीस बचाने के उद्देश्य से यह नियम ला रहा है, लेकिन इसका नुकसान गरीब बच्चों को होगा।
शासन के फैसले पर बढ़ सकती है बहस
RTE प्रवेश नियम में किए गए इस बदलाव को लेकर आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग और निजी स्कूल संगठनों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस फैसले पर पुनर्विचार करता है या इसे यथावत लागू करता है।
