January 13, 2026

पूर्व सरकार के ठेका रैकेट का बड़ा भंडाफोड़, तांत्रिक केके श्रीवास्तव की विदेशी निवेश तक पहुंच की पुष्टि

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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में ठेका दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में आरोपी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके से जुड़े नए तथ्य सामने आए हैं। तेलीबांधा पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि केके और उसके बेटे कंचन ने हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल कर चीन और ऑस्ट्रेलिया में भारी-भरकम रकम निवेश की थी। पुलिस का कहना है कि जांच में दोनों के बैंक खातों में लगभग 441 करोड़ रुपए के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन मिले हैं।

जांच के अनुसार, पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव का प्रभाव काफी बढ़ा हुआ था। वह कई राजनीतिक नेताओं से निकट संपर्क में था। इसी प्रभाव का हवाला देते हुए उसने नोएडा की रावत एसोसिएट्स कंपनी के संचालक अर्जुन सिंह को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 500 करोड़ रुपए के काम दिलाने का भरोसा दिलाया और उनसे 15 करोड़ रुपए वसूल लिए।

तेलीबांधा थाने में मामला दर्ज होते ही केके और उसका बेटा कंचन छिपते-छिपाते प्रदेश छोड़कर भाग निकले। पुलिस की जांच में सामने आया कि एक युवा कांग्रेसी नेता ने अपनी कार में केके को गुप्त रूप से नागपुर पहुंचाया। वहां कुछ दिन रुकने के बाद दोनों दिल्ली चले गए और करीब एक महीने तक वहां ठहरे। इसके बाद केके भोपाल में छिपा रहा, जहां से पुलिस ने 24 जून को उसे गिरफ्तार किया।

अर्जुन सिंह ने जुलाई 2023 के पहले पखवाड़े में 15 करोड़ रुपए अलग-अलग खातों में जमा किए। इनमें से कुछ खाते अब्बास अली नाम के व्यक्ति के थे, जिसे केके का भरोसेमंद सहयोगी बताया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि पिता-पुत्र लगातार अर्जुन सिंह से संपर्क में थे और उन्हें फर्जी दस्तावेज भेजकर विश्वास दिलाते रहे कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर काम शुरू होने वाला है। रकम का कुछ हिस्सा वापस किया गया, लेकिन ज्यादातर पैसा निजी खर्च और विदेशी निवेश में लगाया गया।

चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा कनेक्शन का भी उल्लेख किया गया है। पूरा मामला अब ईडी और सीबीआई की जांच के दायरे में आ चुका है। ईडी ने शुरुआती जांच शुरू कर दी है, जबकि सीबीआई भी जल्द पूछताछ करेगी। महादेव सट्टा प्रकरण की जांच में सीबीआई अब तक 120 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें केके का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अनुमान है कि दिसंबर में इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल हो सकती है। चार्जशीट में भले ही कंचन और अब्बास अली को फरार बताया गया है, लेकिन कंचन के रायपुर और बिलासपुर में देखे जाने की जानकारी मिल रही है। पुलिस ने उसे बनारस में पकड़ा भी था, पर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया, जबकि वह इस मामले में नामजद आरोपी है।

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