CGPSC पर भाजपा नेता के आरोप को आयोग ने बताया भ्रामक, कहा – नियमों के तहत ही हुआ चयन
रायपुर। उद्योग विभाग में बायलर इंस्पेक्टर (निरीक्षक वाष्पयंत्र परीक्षा-2024) के पद पर नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर आरोपों को भ्रामक बताया है। आयोग ने कहा है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप और पारदर्शी ढंग से संपन्न की गई है।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि बायलर इंस्पेक्टर पद पर चयनित अभ्यर्थी कानन वर्मा की नियुक्ति को लेकर भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने राज्यपाल से शिकायत की थी। उनका आरोप था कि चयनित अभ्यर्थी निर्धारित अधिकतम आयु सीमा से अधिक थे। श्रीवास ने यह भी आरोप लगाया था कि आयोग के तीन सदस्यों की भूमिका संदिग्ध रही है। उन्होंने इन सदस्यों को पद से हटाकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और एक सदस्य का चयनित अभ्यर्थी से संबंध होने की चर्चा भी सामने आई थी। उन्होंने राज्यपाल से अनुरोध किया था कि आयोग की निष्पक्षता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए संबंधित सदस्यों को पद से हटाकर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। श्रीवास ने यह भी कहा था कि पूर्व में भी आयोग विवादों में रहा है, इसलिए इस मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
गौरीशंकर श्रीवास ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया था कि इस भर्ती के खिलाफ अभ्यर्थी साकेत अग्रवाल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां न्यायालय ने साकेत अग्रवाल के पक्ष में आदेश पारित करते हुए उन्हें नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। हालांकि, इस आदेश के अनुपालन की स्थिति को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्टता सामने नहीं आई थी। इसी आधार पर उन्होंने चयन प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।
PSC ने कहा– नियमों के तहत हुआ चयन
विवाद के बीच आयोग ने 3 मार्च 2026 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। आयोग ने कहा कि निरीक्षक वाष्पयंत्र परीक्षा-2024 सहित सभी विज्ञापनों से संबंधित चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप संपन्न की गई है। दस्तावेज सत्यापन के समय प्रचलित नियमों के आधार पर ही अधिकतम आयु सीमा संबंधी पात्रता का निर्धारण किया गया और उसी के अनुसार चयन की कार्यवाही की गई।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रथम चयनित अभ्यर्थी किसी भी सदस्य के रिश्तेदार नहीं हैं और सदस्यों के नाम के साथ भ्रामक जानकारी प्रसारित कर चयन प्रक्रिया को दूषित बताने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही आयोग ने कहा कि उच्च न्यायालय में प्रस्तुत वाद से संबंधित आदेशों के अनुरूप आगामी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

