जिसके खौफ से गांव से बाहर नहीं जाते थे लोग, जवानों ने उसे घेरकर मारा, बसंती के आतंक का अंत सुन ग्रामीणों ने मनाया जश्न
कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले स्थित तियारपानी जंगलों में माओवादियों और पुलिस बलों के बीच रविवार को मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में शीर्ष माओवादी कमांडर श्रवण मड़कम उर्फ विश्वनाथ उर्फ बुधराम पुनेम मारा गया। जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया था। चलाया जा रहा है। इस मुठभेड़ में मारे गए तीनों माओवादियों पर 14 लाख रुपये का इनाम था। श्रवण पर 8 लाख रुपये का इनाम था, राजेश पर 5 लाख रुपए और बसंती पर 1 लाख रुपये का इनाम था। इस इलाके में बसंती का खौफ रहता था।
इलाके में था खौफ
मुठभेड़ में मार गई एक लाख रुपये की इनामी नक्सली बसंती कुंजाम भी मारी गई है। वह हिडमें प्रोटेक्शन टीम की मेंबर थी। उसका रावस इलाके में काफी दबदबा था। बताया जाता है कि उसके आतंक से ग्रामीण खौफ में रहते थे। वह ग्रामीणों को मुखबिर होने के नाम पर परेशान करती थी। उसके डर से ग्रामीण गांव से बाहर नहीं जाते थे। उसके मारे जाने की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और जश्न मनाया।
किसी बड़े लीडर को करवा रहे थे क्रास
जानकारी के अनुसार, छिंदखड़क तिरियारपानी का नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। बताया जाता है कि इसी इलाके से नक्सली आना जाना करते हैं। सूत्रों का दावा है कि यह सभी नक्सली किसी बड़े लीडर को क्रॉस करवाने के लिए यहां जमा हुए थे। इसी दौरान सुरक्षाबल के जवानों को इनपुट मिला तो उन्होंने अभियान की शुरुआत की। जिस तरह से नक्सलियों ने अचानक फायरिंग की उससे साफ है कि वह किसी बड़े नेता को क्रॉस करवा रहे थे।
एकमात्र कॉसिंग प्वाइंट
माड़ से गरियाबंद क्षेत्र में आने-जाने के लिए यह नक्सलियों का कभी सुरक्षित क्रॉसिंग प्वाइंट रहा है। जवानों को सूचना मिली की नक्सली मूवमेंट होने वाली है जिसके बाद करीब 500 जवानों ने गरियाबंद और कांकेर के रास्ते को घेर लिया और फिर मिशन को अंजाम दिया।
कहां हुई मुठभेड़
कांकेर पुलिस अधीक्षक इंदिरा कल्याण एलिसेला ने श्रवण की मौत की पुष्टि की, जो सीतानदी-रावस समन्वय क्षेत्र समिति के सचिव के रूप में कार्यरत था। उनके साथ, दो अन्य माओवादी नागरी एरिया कमेटी, गोबरा एलओएस के कमांडर राजेश उर्फ राकेश हेमला और मैनपुर-नुआपाड़ा समन्वय संरक्षण दल की सदस्य बसंती कुंजाम उर्फ हिडमें पीएम भी मारे गए। यह मुठभेड़ धमतरी-ओडिशा सीमा के निकट कांकेर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत छिंदखरक गांव के निकट पहाड़ी वन क्षेत्र में हुई।
माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका
एलिसेला ने बताया कि संयुक्त टीम ने कांकेर के मध्य वन क्षेत्र में माओवादियों की गतिविधि के बारे में खुफिया जानकारी के आधार पर अभियान शुरू किया। यह घटनाक्रम क्षेत्र में माओवादी गतिविधियों के लिए एक बड़ा झटका है। अधिकारियों का मानना है कि इस अभियान से छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर सक्रिय माओवादी गुटों के बीच समन्वय बिगड़ेगा। आसपास के जिलों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और इलाके की पूरी तरह से तलाशी सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
