‘खान सर’ के बाद अब ‘सैलून वाले गुरुजी’ सुर्खियों में छाए, छत्तीसगढ़ में शिक्षक ‘पूनाराम’ पढ़ाई के साथ मुफ्त में काटते हैं ‘बच्चों के बाल’
कबीरधाम। अपनी अनूठी कार्यशैली और सोशल सर्विस के कारण देश में ‘खान सर’ की तरह ही छत्तीसगढ़ के ‘सैलून वाले गुरुजी’ सुर्खियों में छाये हैं। दरअसल कबीरधाम जिले में सरकारी स्कूल के शिक्षक ‘पूनाराम पनागर’ आदिवासी और गरीब बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ उनके बाल भी काटते हैं, ताकि बच्चों का पैसा बचे और वे उससे किताब-कापियां, पेन आदि खरीद सकें।
कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक ‘पूनाराम पनागर’ चर्चा का विषय बने हुए हैं। लोग उन्हें प्यार से ‘ सैलून वाले गुरुजी ‘ के नाम से जानते हैं। खास बात यह है कि वे न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उनके बाल भी मुफ्त में काटते हैं। पूनाराम बच्चों से कहते हैं कि वे बाल कटिंग पर खर्च होने वाले पैसों को बचाकर कॉपी, पेन और पढ़ाई से जुड़ी अन्य ज़रूरी चीज़ें खरीदें।
13 साल पहले प्राथमिक विद्यालय से शुरू की थी सेवा
सेवाभावी शिक्षक पूनाराम ने यह पहल 13 साल पहले साल 2012 में तब शुरू की, जब उनकी पोस्टिंग बोड़ला के महलीघाट गांव के प्राथमिक विद्यालय में थी। यह इलाका आदिवासी बाहुल्य है और यहां कोई सैलून नहीं था। बच्चे महीनों तक बाल नहीं कटवाते थे, जिससे उन्हें परेशानी होती थी। ऐसे में पूनाराम ने खुद ही बच्चों के बाल काटने शुरू कर दिए। बाद में उनका तबादला बोड़ला के मिडिल स्कूल में हो गया। यहां भी उन्होंने देखा कि सरकारी छात्रावास (एससी-एसटी हॉस्टल) में रहने वाले अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं। तब से वे महीने में एक रविवार को बच्चों के बाल मुफ्त में काटते हैं।
फ्री कोचिंग और टॉपर को इनाम भी देते हैं
शिक्षक पूनाराम बच्चों की मुफ्त कोचिंग भी करते हैं। वे बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतियोगिता कराते हैं और जो विद्यार्थी ज़िले या प्रदेश स्तर पर टॉपर बनते हैं, उन्हें अपनी ओर से 10 से 15 हज़ार रुपये तक का इनाम भी देते हैं। इसके अलावा वे हर साल पर्चे छपवाकर लोगों से अपील करते हैं कि बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में ही कराएं।
समाज में मिसाल बनकर उभरे हैं शिक्षक पूनाराम
पूनाराम की इस पहल की सराहना न सिर्फ बच्चे और अभिभावक, बल्कि अन्य शिक्षक भी करते हैं। स्कूल के साथी शिक्षक कृष्ण कुमार धुर्वे बताते हैं, ‘पूनाराम सर’ बच्चों की शिक्षा को लेकर बेहद सजग हैं। उनकी सोच है कि बच्चों के पैसे बचें और वे उनका उपयोग पढ़ाई के अन्य ज़रूरी साधनों में करें। साथ ही वे गरीब और कमजोर बच्चों को फ्री कोचिंग देते हैं और टॉप करने वालों को इनाम भी प्रदान करते हैं।
