January 22, 2026

CG VIDEO : नहीं देखा होगा कभी ऐसा परफॉर्मेंस, 3000 फीट की ऊंचाई पर गणेशजी की मूर्ति के सामने दिल थाम लेने वाला खेल

DHOLKAL

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की बैलाडिला पहाड़ी पर ढोलकर गणेश जी का मंदिर है। इस मंदिर की ऊंचाई करीब 3 हजार फीट है। ढोलकल गणपति के सामने अबूझमाड़ मलखंब खिलाड़ियों की टीम ने अनोखा प्रदर्शन किया है। मलखंभ के खिलाड़ियों द्वारा किया गया यह अनोखा प्रदर्शन हैरान कर देने वाला है। मलखंब खिलाड़ियों ने अपने अदभुत खेल कला का प्रदर्शन भगवान गणेश के सामने किया है। इसके वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं। इस वीडियो को देखकर लोग दांतों तले अपनी ऊंगली दबा लेंगे।

छोटी सी चूक में हो सकता था बड़ा हादसा
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के बैलाडीला स्थित ढोलकल की पहाड़ियों बहुत दुर्गम हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इतने दुर्गम स्थान पर ऐसा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों के हौसले को देखकर हर कोई हैरान है। सोशल मीडिया में लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं। लोगों का कहना है इतनी ऊंचाई में ऐसा करतब दिखाने में जान का भी खतरा हो सकता था।

पहाड़ियों और चट्टानों में रस्सी बांधकर प्रदर्शन
बताया जा रहा है कि मलखंभ का प्रदर्शन करने वाली टीम के सभी खिलाड़ी कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। इस टीम के खिलाड़ियों को कई इनाम भी मिले हैं। खिलाड़ियों ने पहाड़ियों में चट्टानों के बीच रस्सी बांधकर मलखंब का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन को देख हर कोई हैरान था। इस प्रदर्शन का वीडियो छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने सोशल मीडिया में शेयर किया है।

क्या है मलखंब का खेल
मलखंब खेल की गिनती हमारे देश के प्राचीन खेलों में होती है। इस खेल में एक मजबूत लकड़ी को खिलाड़ी खंभे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। रस्सी और हाथ पैरों की मदद से इस खंभे पर कई तरह के करतब दिखाते हैं।

क्या है इस जगह का खास बात
ढोलकल गणेश की प्रतिमा दंतेवाड़ा जिले में बैलाडिला की पहाड़ियां और घने जंगल में स्थापित है। जिस पहाड़ में यह प्रतिमा स्थापित है उसकी ऊंचाई करीब 3 हजार फीट ऊंची है। पहाड़ की चोटी पर खुले आसमान के नीचे भगवान गणेश की प्रतिमा है। ऐसा कहा जाता है कि कहा जाता है यह मंदिर नागवंश के दौरान 10वीं और 11वीं शताब्दी के बीच बना था। इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति के ऊपरी बाएं हाथ में टूटा हुआ दांत है। ऐसी मान्यता है भगवान परशुराम के फरसे से कटकर यहीं गणपति जी का एक दांत गिरा था।

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