January 22, 2026

CG : धान खरीदी में पिछली बार का टूटा रेकॉर्ड, 25 सालों में पहली बार इतनी खरीदी, किसानों को 31 हजार 89 करोड़ रुपये का पेमेंट….

DHAN KHARIDI MC12

रायपुर। छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की आखिरी डेट 31 जनवरी थी। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि राज्य में धान खरीदी के लिए अभी 15 दिनों का समय और बढ़ाया जाए। वहीं, खाद्य विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस बार रेकॉर्ड तोड़ धान की खरीदी हुई है। धान खरीदी के अंतिम दिन शाम तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 149 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी हो चुकी है। अधिकारियों ने कहा कि अभी ये फाइनल आकंड़े नहीं हैं। अंतिम दिन देर रात कर धान की खरीदी होगी।

पिछले साल का टूटा रिकॉर्ड
राज्य के 25 लाख 49 हजार पंजीकृत किसानों ने अब तक धान बेचा है। धान खरीदी के एवज में किसानों को बैंक लिंकिंग व्यवस्था के तहत 31 हजार 89 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई थी।

खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मीलिंग के लिए तेजी के साथ धान का उठाव किया जा रहा है। अभी तक 121 लाख मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ और टीओ जारी कर दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में अभी तक 100 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है। राज्य में इस साल धान बिक्री के लिए 27.78 लाख किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। इसमें 1.59 लाख नए किसान शामिल थे।

कांग्रेस की मांग 15 दिन का समय बढ़ें
प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने धान खरीदी की तिथि 15 दिन बढ़ाए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 3 लाख पंजीकृत किसान अपनी धान नहीं बेच पाए हैं। अब तक की धान खरीदी सरकार के द्वारा ही निर्धारित लक्ष्य से लगभग 15 लाख मैट्रिक टन कम की हुई है। टोकन और बारदानों की कमी, परिवहन के अभाव में संग्रहण केंद्रों में बफर लिमिट से अधिक धान के जाम हो जाने के कारण धान खरीदी का कार्य बेहद धीमी गति से हुआ, जिसके चलते प्रदेश के लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं। सरकार धान खरीदी की तिथि 15 दिन बढ़ाये।

उन्होंने कहा कि सरकार की अपेक्षा, उदासीनता और बदइंतजामी के चलते ही छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार किसान अपने उपज को बेचने के लिए इतना परेशान हुआ। बारदाना की व्यवस्था से लेकर टोकन को लेकर पूरा सिस्टम लगातार बाधित होते रहा। मिलिंग और समय पर परिवहन करवाने में यह घोर लापरवाही बरती गई, पूर्ववर्ती सरकार में 72 घंटे के भीतर धान संग्रहण केंद्रों से धान के उठाव का जो नियम था उसे भी साय सरकार ने दुर्भावना पूर्वक बदल दिया।

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